
Lucknow, 20 दिसंबर . बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बिहार के Chief Minister नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि महिला सम्मान, प्रशासनिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़े मामलों को सत्ता और बयानबाजी के हवाले छोड़ देना दुर्भाग्यपूर्ण है.
बसपा मुखिया मायावती ने social media मंच एक्स पर लिखा कि बिहार के Chief Minister नीतीश कुमार द्वारा डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरण के सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब (चेहरे का नकाब) हटाने का मामला सुलझने की बजाय, ख़ासकर मंत्रियों आदि की बयानबाजी के कारण, विवाद का रूप लेकर यह लगातार तूल पकड़ता ही जा रहा है, जो दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है. जबकि यह मामला पहली नज़र में ही महिला सुरक्षा व सम्मान से जुड़ा होने के कारण Chief Minister के सीधे हस्तक्षेप से अब तक सुलझ जाना चाहिए था, खासकर तब जब कई जगहों पर ऐसी अन्य वारदातें भी सुनने को मिल रही हैं.
उन्होंने आगे कहा, “अच्छा होगा कि Chief Minister इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखते हुए इसके लिए पश्चाताप कर लें और कड़वे होते जा रहे इस विवाद को यहीं पर ख़त्म करने का प्रयास करें. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिला Police द्वारा Police परेड में, स्थापित परम्परा/नियमों से हटकर, एक कथावाचक को सलामी देने का मामला भी काफी बड़े विवाद में है और इसको लेकर Government कठघरे में है. Police परेड व सलामी की अपनी परम्परा/नियम, मर्यादा, अनुशासन व पवित्रता है, जिसको लेकर खिलवाड़ कतई नहीं किया जाना चाहिये.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि हालांकि यह अच्छी बात है कि यूपी के Police प्रमुख ने इस घटना का संज्ञान लेकर जिला Police कप्तान से जवाब तलब किया है. कार्रवाई का लोगों को इंतज़ार है. वैसे राज्य Government भी इसको गंभीरता से लेकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लगाए तो यह Police प्रशासन/अनुशासन एवं कानून के राज के हक़ में उचित होगा.
मायावती ने आगे लिखा कि जहां तक कल दिनांक 19 दिसम्बर से शुरू हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के संक्षिप्त शीतकालीन सत्र का सवाल है, तो यह सत्र भी पिछले सत्रों की तरह ही, जनहित व जनकल्याण के मुद्दों से दूर रहने के कारण सत्ता व विपक्ष के बीच वाद-विवाद में घिर गया है. बेहतर होता कि Government किसानों के खाद की समस्या के साथ-साथ जनहित की अन्य समस्याओं तथा जनकल्याण के प्रति गंभीर होकर सदन में इन पर जवाबदेह होती.
बसपा प्रमुख ने कहा कि साथ ही, संसद का शीतकालीन सत्र भी, राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भीषण समस्या सहित देश व जनहित की विकराल रूप धारण कर रही समस्याओं पर विचार किये बिना ही, कल समाप्त हो गया. जबकि पूरे देश की निगाहें लगी थी कि Government व विपक्ष दोनों देश की ज्वलंत समस्याओं पर विचार करेंगे और इससे कुछ उम्मीद की नई किरण पैदा होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. देश की चिंताएं लगातार बरकरार हैं.
एक अन्य पोस्ट पर उन्होंने लिखा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं तथा वहां भी नेपाल की तरह India विरोधी गतिविधियां बढ़ रही हैं, वो भी चिन्तनीय स्थिति है, जिस पर भी केन्द्र Government समुचित संज्ञान लेकर दीर्घकालीन नीति के तहत कार्य करे तो यह उचित होगा.
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विकेटी/एएस