
पेरिस, 14 मार्च . जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में उठाया गया. एक अंतरराष्ट्रीय सिविल सोसायटी समूह ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जवाबदेही और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.
सत्र के दौरान इको फॉन सोसाइटी के प्रतिनिधि यासेर लारूसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया को और मजबूत करने तथा आम नागरिकों पर हमले करने वालों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया.
लारूसी ने पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए इसे मानवता के खिलाफ “निर्दयी हमला” बताया. उन्होंने कहा कि नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है.
उन्होंने यूएनएचआरसी को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद अपने हर रूप में जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे सार्वभौमिक अधिकारों के लिए सीधा खतरा है और यह मानव गरिमा व सभ्य व्यवस्था के खिलाफ है.
लारूसी ने कहा, “किसी भी Political, वैचारिक या रणनीतिक बहाने से निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता.”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठनों को सीमा पार से मिलने वाला समर्थन या उन्हें दी जाने वाली शरण अंतरराष्ट्रीय शांति और देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बढ़ा सकती है.
लारूसी ने सदस्य देशों से अपील की कि आतंकवादियों को दंड से बचने न दिया जाए और जो लोग आतंकवादी संगठनों को शरण, वित्तीय मदद या अन्य सहायता देते हैं, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं.
रिपोर्ट के अनुसार, इस हस्तक्षेप के जरिए संगठन ने आतंकवाद के पीड़ितों की सुरक्षा, मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में Pakistan समर्थित आतंकियों ने हमला कर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. इसे 2008 के 2008 Mumbai हमले के बाद India में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला माना गया.
इस हमले की जिम्मेदारी Pakistan आधारित आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन माना जाता है और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है.
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डीएससी