अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दावा, ‘भारत के डिजिटल सुधारों से छोटे उद्यमों की उत्पादकता बढ़ी’

वाशिंगटन, 2 मई . India में सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण ने सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो एंटरप्राइजेज) की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वर्किंग पेपर में यह निष्कर्ष सामने आया है.

अध्ययन के अनुसार, 2010 से 2015 के बीच राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए डिजिटल सुधारों ने छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता में सुधार किया. यह विश्लेषण 2010-11 और 2015-16 के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के फर्म-स्तरीय आंकड़ों पर आधारित है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन राज्यों ने कर प्रणाली, परमिट, निरीक्षण और विवाद निपटान जैसे क्षेत्रों में अधिक डिजिटल सुधार किए, वहां उत्पादकता वृद्धि ज्यादा देखी गई और कंपनियों के बीच प्रदर्शन का अंतर कम हुआ.

शोध में पाया गया, “जो राज्य सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण को अधिक अपनाते हैं, वहां फर्मों की उत्पादकता तेजी से बढ़ती है और उनके बीच असमानता घटती है.”

ये सुधार व्यापक कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा थे. 2014 में राज्यों ने 98-बिंदु कार्ययोजना पर सहमति जताई थी, जिसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना था.

अध्ययन में सुधारों को छह प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है—टैक्स सिस्टम, निर्माण परमिट, पर्यावरण व श्रम अनुपालन, निरीक्षण, वाणिज्यिक विवाद और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस. जिन राज्यों ने इन क्षेत्रों में अधिक प्रगति की, वहां कुल कारक उत्पादकता (टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी) में अधिक वृद्धि दर्ज की गई.

डिजिटल टूल्स ने खासतौर पर छोटे कारोबारों पर प्रशासनिक बोझ कम किया. रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग और स्वचालित अनुमोदन जैसी प्रणालियों ने पारदर्शिता बढ़ाई, देरी घटाई और अनौपचारिक लागतों को कम किया.

रिपोर्ट में कहा गया, “प्रक्रियाओं को स्वचालित और पारदर्शी बनाकर डिजिटलीकरण सभी व्यवसायों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करता है.”

अध्ययन में यह भी पाया गया कि सुधार-उन्मुख राज्यों में कंपनियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा. साथ ही, सुधारों के शुरुआती चरण में लाभ अधिक मिला, जबकि समय के साथ इनका प्रभाव कुछ कम होता गया.

India का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र विनिर्माण उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत योगदान देता है और करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है.

आईएमएफ का यह अध्ययन संकेत देता है कि डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों ने खासकर छोटे कारोबारों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने में ठोस योगदान दिया है.

केआर/

Leave a Comment