
New Delhi, 27 अप्रैल . भारतीय नौसेना के सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने अपनी स्पेन यात्रा का अहम पड़ाव पार कर लिया है. स्पेन के आम नागरिकों के लिए यह भारतीय शिप खोला गया था. स्थानीय लोगों और स्पेन में रह रहे भारतीय प्रवासी समुदाय ने बड़ी संख्या में जहाज का दौरा किया. आगंतुकों को जहाज का विस्तृत भ्रमण कराया गया और India की समृद्ध समुद्री परंपरा से अवगत कराया गया.
भारतीय नौसेना का यह पोत पाल के जरिए समुद्री यात्रा कर रहा है. यह शिप 22 हजार नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा पर है. भारतीय नौसेना के इस जहाज की स्पेन यात्रा उसके महत्वाकांक्षी लोकायन-26 ट्रांसओशेनिक अभियान का एक अहम पड़ाव भी रहा. इस यात्रा ने समुद्री कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई मजबूती दी है. तीन दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के बाद अब यह पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है.
इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसैनिक कमान के प्रमुख रियर एडमिरल सैंटियागो डे कोल्सा ट्रुएबा से शिष्टाचार भेंट की. इस मुलाकात में India और स्पेन की नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, विश्वास और साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया. दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान के महत्व पर भी विचार साझा किए.
वहीं, पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के नाविकों ने समुद्री जीवन के अपने अनुभव साझा किए, जिससे लोगों के बीच आपसी समझ और मित्रता का भाव और प्रगाढ़ हुआ. आईएनएस सुदर्शिनी अब अपनी अगली मंजिल मिंडेलो, केप वर्डे के लिए रवाना हो चुकी है, जो उसके अफ्रीकी क्षेत्र का अंतिम पड़ाव होगा. इसके बाद जहाज ट्रांस-अटलांटिक यात्रा पर अग्रसर होगा. अब तक यह जहाज पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न देशों में सात सफल पोर्ट कॉल कर चुका है.
लोकायन-26 अभियान भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत वह विश्वभर के देशों के साथ मित्रता और आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है. यह यात्रा न केवल India की समुद्री क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि वैश्विक मंच पर India की सकारात्मक और सहयोगात्मक भूमिका को भी उजागर करती है.
बता दें कि आईएनएस सुदर्शिनी 20 जनवरी को कोच्चि स्थित नौसैनिक अड्डे से रवाना हुआ था. यह अभियान ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और विजन ‘महासागर’ से प्रेरित है. ‘सुदर्शनी’ करीब 10 महीने लंबी यात्रा पर है. अपनी इस यात्रा के दौरान यह कुल 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों पर पहुंचेगा.
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जीसीबी/डीकेपी