
रांची, 15 जून . Jharkhand में स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जोड़ने की दिशा में राज्य Government ने एक नई पहल की है.
Chief Minister हेमंत सोरेन ने Monday को रांची में आयोजित ‘मेडटेक इनोवेशन डे’ के दौरान ‘डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की. इसके तहत बीमारियों की पहचान, जांच और निगरानी के लिए विकसित नई तकनीकों को पहले जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाएगा. सफल होने पर इन्हें पूरे राज्य में लागू किया जाएगा. मेडटेक (मेडिकल टेक्नोलॉजी) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने वाले उपकरण, सॉफ्टवेयर और डिजिटल समाधान शामिल होते हैं.
वहीं, ‘डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स’ ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी नई तकनीक को सीधे बड़े स्तर पर लागू करने के बजाय पहले चुनिंदा जिलों में उसका परीक्षण किया जाता है, ताकि उसकी उपयोगिता, प्रभाव और व्यावहारिक चुनौतियों का आकलन किया जा सके. कार्यक्रम में 13 स्टार्टअप कंपनियों ने एनीमिया, टीबी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों की पहचान तथा निगरानी से जुड़ी नई तकनीकों का प्रदर्शन किया. इनमें एआई-आधारित जांच प्रणाली, पोर्टेबल मेडिकल उपकरण, डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम और रोग पहचान तकनीकें शामिल थीं. इनका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को तेज, सटीक और कम खर्चीला बनाना है.
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि Jharkhand के दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है. नई तकनीक और एआई की मदद से इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि Government चाहती है कि उपयोगी तकनीकों को जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि इलाज की गुणवत्ता बेहतर हो और मानवीय त्रुटियां कम हों.
उन्होंने राज्य में रियल टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य संबंधी अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होने से क्षेत्रवार बीमारियों की पहचान कर बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी.
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना है.
वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य में 745 ‘अबुआ मेडिकल स्टोर’ खोले जाएंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो Jharkhand उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां नई स्वास्थ्य तकनीकों का परीक्षण और उपयोग सीधे जिला एवं ग्रामीण स्तर पर किया जाएगा. इससे मरीजों को बेहतर, सुलभ और अपेक्षाकृत कम लागत वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
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एसएनसी/डीकेपी