भारत ने अमेरिका-ईरान बातचीत में शुरुआती सफलता का किया समर्थन: विदेश मंत्री जयशंकर

हेलसिंकी, 13 जून . India के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका-ईरान बातचीत से जल्द ही कोई कामयाबी मिलेगी. उन्होंने कहा कि लगातार चल रहा टकराव मुश्किलें खड़ी कर रहा है और दुनिया का ज्यादातर हिस्सा निराशा वाली स्थिति में है.

हेलसिंकी में कुलटारेंटा वार्ता में अपनी फिनिश समकक्ष एलिना वाल्टोनन और संयुक्त अरब अमीरात की साहयक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह के साथ “उभरती ताकतें और नए भू-Political मुकाबले” पर एक पैनल चर्चा के दौरान India के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि India समेत कई देश बढ़ते संघर्ष के बीच तनाव कम करने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.

जब पूछा गया कि क्या India सिर्फ एक तरह के “फ्रस्ट्रेटेड ऑब्जर्वर” की भूमिका में फंसा हुआ है या स्थिति को संभालने में मदद के लिए और कुछ कर सकता है? इस पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “मुझे लगता है कि इस समय दुनिया का ज्यादातर हिस्सा एक फ्रस्ट्रेटेड ऑब्जर्वर की स्थिति में फंसा हुआ है. लेकिन बहुत सारे देश इस स्थिति में वह करने की कोशिश कर रहे हैं जो वे कर सकते हैं. इसलिए यह कोशिश न करने की वजह से नहीं है. मैं सिर्फ हमारे बारे में बात कर रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है कि निश्चित रूप से ऐसे बहुत सारे देश नहीं हैं जिनके सभी शामिल पार्टियों के साथ अच्छे संबंध होंगे. इसलिए यह साफ है कि हमने देशों के साथ एक तरह से तर्क किया है. हम उनके संपर्क में हैं. हमें बहुत उम्मीद है कि अमेरिका-ईरान बातचीत से जल्दी नतीजा निकलेगा. लड़ाई जारी रहने से समस्याएं पैदा हो रही हैं.”

विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया में स्थिति की जटिलता पर अधिक जोर देते हुए कहा कि India के इस क्षेत्र के सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स, जिनमें अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देश शामिल हैं, के साथ मजबूत संबंध हैं. India को दुनिया की उन बड़ी ताकतों में से एक बताते हुए, जिनकी भूमिका बड़े वैश्विक मुद्दों पर मायने रखती है, मॉडरेटर ने डॉ. एस जयशंकर से पूछा कि New Delhi रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़ी स्थिति से पैदा हुई दोहरी चुनौतियों का आकलन कैसे करती है और वह उनसे कैसे निपटने की कोशिश कर रही है.

एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “ज्यादातर देश उन युद्धों के लिए कमिटेड होते हैं जिन्हें वे लड़ते हैं और उन युद्धों के बारे में साफ नहीं होते जिन्हें वे एक आम बात मानते हैं. इसलिए मैं अपने आस-पास के कई युद्धों के बारे में सोच सकता हूं जिनके बारे में बाकी दुनिया का नजरिया काफी साफ नहीं है. इस खास मामले में चुनौती यह है. आसान शब्दों में कहें तो, आपके पास चार पार्टियां हैं, जो अमेरिका, इजरायल और ईरान हैं. मैं खाड़ी देशों को एक पार्टी के तौर पर इस्तेमाल कर रहा हूं, हालांकि मैं मानता हूं कि वे हैं; उनकी स्थिति बहुत अलग है और उन सभी के साथ हमारे बहुत अच्छे, बहुत मजबूत संबंध हैं.”

जब पूछा गया कि क्या यह असेसमेंट ईरान पर भी लागू होता है, तो विदेश मंत्री जयशंकर ने जवाब दिया कि India तेहरान के साथ “अच्छे और मजबूत संबंध” रखता है, जबकि उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके के डायनामिक्स में शामिल चार खास लोगों के साथ New Delhi के संबंध नेचर या स्कोप में एक जैसे नहीं हैं.

केके/डीएससी

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