भारत 70 प्रतिशत से अधिक टेक्सटाइल वेस्ट कर रहा दोबारा इस्तेमाल

New Delhi, 12 जुलाई . India के कुल टेक्सटाइल वेस्ट (कपड़े के कचरे) का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अभी सर्कुलर इकॉनमी के तहत रिकवर किया जाता है और उसे रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग, डाउनसाइक्लिंग या दोबारा इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है. यह जानकारी Government की ओर से जारी फैक्टशीट में Sunday को दी गई.

सर्कुलर इकॉनमी एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था है जिसमें मटीरियल और संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल और रीसाइकिल किया जाता है और उन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल में रखा जाता है. इससे कचरा और उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है और साथ ही उत्पादन का अधिक टिकाऊ तरीका अपनाया जाता है. इसका मुख्य सिद्धांत इनपुट के इस्तेमाल में चक्र की तरह निरंतरता बनाए रखना है.

टेक्सटाइल सेक्टर में, सप्लाई चेन के बुरे असर को कम करने के लिए सस्टेनेबिलिटी और चक्र की तरह निरंतरता जरूरी हैं. मौजूदा मटीरियल को उनके मूल ढांचे में बदलाव किए बिना दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. इससे ऊर्जा, केमिकल और पानी का इस्तेमाल कम होता है और पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भी घटता है.

हर साल प्रबंध किए जाने वाले 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में से 90 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू प्री-कंज्यूमर और पोस्ट-कंज्यूमर कचरे से आता है.

फैक्टशीट के अनुसार, रिकवरी खास तौर पर प्री-कंज्यूमर स्टेज पर मजबूत है, जहां लगभग 95 प्रतिशत टेक्सटाइल कचरा इकट्ठा किया जाता है और स्थापित वैल्यू-चेन नेटवर्क के जरिए दोबारा इस्तेमाल किया जाता है.

स्पिनिंग सेक्टर ‘क्लोज्ड-लूप सर्कुलैरिटी’ का एक बेहतरीन उदाहरण है. स्पिनिंग से निकलने वाले लगभग सभी कचरे को दोबारा प्रोडक्शन में इस्तेमाल किया जाता है. इस्तेमाल के बाद बचे कपड़ों के मामले में भी सर्कुलैरिटी दिखती है. India के बड़े कलेक्शन और सॉर्टिंग नेटवर्क की वजह से इस तरह के कचरे का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा लैंडफिल में जाने से बचाया जाता है.

फैक्टशीट बताती है कि यह इकोसिस्टम लगभग 40-45 लाख लोगों की आजीविका का साधन है, जिसमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाएं कलेक्शन, सॉर्टिंग और दोबारा वितरण में अहम भूमिका निभाती हैं.

इस दायरे में, पूरे सेक्टर में सर्कुलर प्रोडक्शन तेजी से बढ़ रहा है. टेक्सटाइल कारीगरी और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करके प्रोडक्शन करने की India की समृद्ध विरासत को अब अधिक पहचान मिल रही है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट में ऐसे उत्पादों को महत्व दिया जा रहा है जिनका पर्यावरण पर असर कम होता है.

फैक्टशीट देश भर की प्रमुख सुविधाओं में टेक्सटाइल वेस्ट के सर्कुलेशन के कामकाज के बारे में भी विस्तार से बताती है.

नवी Mumbai के बेलापुर में India की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी, टेक्सटाइल वेस्ट को सर्कुलर इकोनॉमी के एक अवसर के रूप में देखती है. यह फैसिलिटी कलेक्शन, सॉर्टिंग, अपसाइक्लिंग, टेक्नोलॉजी और आजीविका को एक सर्कुलर रिकवरी इकोसिस्टम में जोड़ती है. इसने 30 मीट्रिक टन पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट इकट्ठा किया है, 25.5 मीट्रिक टन की सॉर्टिंग की है, 41,000 से अधिक आइटम प्रोसेस किए हैं और 400 से अधिक अपसाइकल किए गए सैंपल तैयार किए हैं. यह 1.14 लाख परिवारों तक पहुंची है और प्रदर्शनियों व मार्केट तक पहुंच के जरिए महिला कारीगरों की मदद की है.

India दुनिया में टेक्सटाइल और कपड़ों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है और ग्लोबल एक्सपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी 4 प्रतिशत है. यह सेक्टर 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे रोजगार भी देता है, जिनमें कई महिलाएं और ग्रामीण इलाकों के कामगार शामिल हैं.

अपने आर्थिक आकार, एक्सपोर्ट से जुड़े संबंधों और रोज़गार पैदा करने की क्षमता को देखते हुए, इस सेक्टर के लिए सस्टेनेबिलिटी बहुत जरूरी हो गई है.

Governmentी बयान में कहा गया है कि जैसे-जैसे ग्लोबल मार्केट पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार प्रोडक्शन की ओर बढ़ रहे हैं, India के टेक्सटाइल उद्योग के पास अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने का मौका है.

एबीएस

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