
New Delhi, 7 मार्च . शीर्ष Governmentी सूत्रों ने इस आशंका को खारिज किया कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा स्थिति India के लिए संकट बन सकती है. India के पास फिलहाल 250 मिलियन बैरल (करीब 4,000 करोड़ लीटर) से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद का भंडार है, जो पूरी आपूर्ति श्रृंखला में लगभग 7–8 सप्ताह का बफर प्रदान करता है.
New Delhi, 7 मार्च . ये भंडार किसी एक स्थान या एक ही रूप में नहीं रखे गए हैं. इन्हें जमीन के ऊपर बने स्टोरेज टैंकों, भूमिगत रणनीतिक गुफाओं, पाइपलाइन सिस्टम, टर्मिनल टैंकों, समुद्र में ट्रांजिट में मौजूद स्टोरेज जहाजों और तीन समर्पित रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाओं मैंगलोर, पडुर और विशाखापटनम में वितरित किया गया है.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, India के पास कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त भंडार है, जिससे अल्पकालिक आपूर्ति व्यवधानों से निपटा जा सकता है. साथ ही, देश कई वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से ऊर्जा की आपूर्ति जारी रखे हुए है.
सूत्रों ने कहा, “यह दावा कि वैश्विक तेल आपूर्ति रुक गई है या India के पास केवल 25 दिन का भंडार है, गलत है और वास्तविक आपूर्ति व स्टॉक स्थिति को नहीं दर्शाता.” India सोची-समझी और मजबूत रणनीतिक स्थिति में है, जो पिछले 12 वर्षों की निरंतर ऊर्जा नीति का परिणाम है.
बफर वास्तविक है, आपूर्ति मार्ग विविध हैं और आपूर्ति का रिकॉर्ड लगातार बना हुआ है. यह बफर किसी काउंटडाउन की तरह नहीं है, बल्कि नियमित आयात के अतिरिक्त है. हर दिन कई मार्गों से तेल आयात जारी रहता है. भले ही Strait of Hormuz से आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाए, तब भी India के विविध स्रोतों के कारण प्रभाव आंशिक होगा, पूरी तरह नहीं. Governmentी सूत्रों के अनुसार India के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इस मार्ग से नहीं गुजरता.
पिछले एक दशक में India की रणनीतिक तेल कूटनीति ने आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 40 कर दी है, जो छह महाद्वीपों में फैले हुए हैं.
अब वह दौर समाप्त हो चुका है जब India की ऊर्जा सुरक्षा किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर होती थी. अब आपूर्ति रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका महाद्वीप, मध्य एशिया और खाड़ी क्षेत्र के बाहर के मध्य-पूर्वी मार्गों से भी होती है. इसलिए किसी एक मार्ग में बाधा आने पर केवल स्रोतों का समायोजन करना पड़ता है लेकिन आपूर्ति संकट नहीं बनता.
सूत्रों ने कहा कि होर्मुज जलडमरू मध्य India के कच्चे तेल आयात का एकमात्र मार्ग नहीं है. करीब 40 प्रतिशत आयात इस जलडमरू मध्य से गुजरता है जबकि लगभग 60 प्रतिशत अन्य मार्गों से आता है. इसी कारण वैश्विक संकट या महामारी के दौरान भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की कोई कमी नहीं हुई.
कई देशों, जिनमें आस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं, ने अतिरिक्त गैस आपूर्ति की पेशकश भी की है. India ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जारी रखे हुए है. हाल ही में India ने अमेरिका और यूएई जैसे साझेदारों के साथ नई ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्थाएं भी की हैं.
India का रिफाइनिंग ढांचा 258 एमएमटीपीए क्षमता के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा है, जो देश की कुल घरेलू खपत 210 से 230 एमएमटीपीए से अधिक है. भारतीय रिफाइनरियां विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं और किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं हैं.
सूत्रों के अनुसार यह लचीलापन खुद में एक सुरक्षा संपत्ति है, जिसे पिछले दशक में नीतिगत रूप से विकसित किया गया है. India वैश्विक स्तर पर परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का पाँचवाँ सबसे बड़ा निर्यातक भी है.
जब यूरोप ने रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगाया था, तब ईंधन की कमी को पूरा करने में India की रिफाइनरियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. India ने रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की अनुमति पर निर्भरता नहीं रखी.
फरवरी 2026 तक भी India रूस से तेल आयात कर रहा है और रूस अभी भी India का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन वर्षों के दौरान भी India ने अमेरिकी और यूरोपीय आपत्तियों के बावजूद रूसी तेल खरीदना जारी रखा. 2022 के बाद रियायती कीमतों और रिफाइनरियों की मांग के कारण आयात में काफी वृद्धि हुई.
इसलिए यह कहना कि कोई अल्पकालिक छूट इन खरीदों को “संभव” बनाती है, वास्तविकता को नहीं दर्शाता, क्योंकि यह व्यापार लगातार जारी रहा है. सूत्रों ने कहा कि India दुनिया को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक है, जो उसकी ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत करता है.
–
एनए/पीयूष