Skip to content
Friday, 23 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
INDIA

ईरान संघर्ष के दौरान भारत बना अमेरिका का अहम साझेदार, समझौते के बाद क्या पुराने तेवर में लौटेंगे ट्रंप?

ईरान संघर्ष के दौरान India बना अमेरिका का अहम साझेदार, समझौते के बाद क्या पुराने तेवर में लौटेंगे ट्रंप?

New Delhi, 21 जून . अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी बार वापसी के बाद वैश्विक भू-राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ना केवल वर्ल्ड ऑर्डर में तेजी से बदलाव आ रहा है, बल्कि अमेरिका की कूटनीति में भी परिवर्तन नजर आ रहा है. ट्रंप ने सत्ता संभालते ही अन्य देशों पर टैरिफ बम फोड़ा, जिसने विश्व स्तर पर काफी हलचल पैदा कर दी. President ट्रंप दुनिया के तमाम देशों को अमेरिका के साथ व्यापार करने के लिए अपनी शर्तें मानने पर मजबूर कर रहे थे. हालांकि, India ने ट्रंप के दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया.

दरअसल, जनवरी 2025 में ट्रंप ने President पद की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 28 फरवरी से पहले तक अमेरिकी President दुनिया के कई देशों को भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दे रहे थे. वैश्विक व्यापार को लेकर उनके सख्त रुख की लगातार चर्चा हो रही थी और कई देशों के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंधों में तनाव देखने को मिल रहा था, हालांकि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और प्राथमिकताओं में बदलाव दिखाई दिया.

ईरान के साथ हमलों में उलझने के बाद अमेरिकी Government का फोकस व्यापारिक विवादों से पूरी तरह से हट चुका था. बार-बार टैरिफ को लेकर धमकियां देने वाले ट्रंप 28 फरवरी के बाद पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक साझेदारियों को लेकर उलझे नजर आए. दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान ट्रंप ने न केवल टैरिफ को लेकर अपेक्षाकृत कम बयान दिए, बल्कि India और Pakistan के बीच संघर्ष विराम को लेकर भी पहले जैसी सक्रिय टिप्पणियां नहीं कीं.

बीते लगभग 100 दिनों का घटनाक्रम देखें, तो कई देशों ने अमेरिका से एक निश्चित दूरी बनाने की कोशिश की है. यूरोप के कुछ देशों ने सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई, जबकि पश्चिम एशिया के कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया. ऐसे माहौल में अमेरिका के लिए India जैसे बड़े और विश्वसनीय साझेदार का महत्व और बढ़ गया.

यही कारण है कि हाल के समय में अमेरिकी President ट्रंप की तरफ से India के Prime Minister Narendra Modi की सराहना होने लगी. हाल के महीनों में उन्होंने कई अवसरों पर मोदी को एक मजबूत और प्रभावशाली नेता बताया. फ्रांस में जी7 बैठक के इतर पीएम मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात के बाद ट्रंप ने उन्हें एक बेहद मजबूत और महान नेता बताया. ट्रंप ने तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने India को युद्धों से दूर रखा है, जो कि बेहद समझदारी भरा कदम है.

India को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जाता है और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी New Delhi की भूमिका अहम मानी जाती है. अमेरिकी दबाव के बावजूद India ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है. वाशिंगटन अब यह भली-भांति समझ चुका है कि एशिया-प्रशांत और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी धाक बचाए रखने के लिए उसे New Delhi के सहयोग की सख्त जरूरत है.

हालांकि, ट्रंप का झुकाव केवल India ही नहीं, बल्कि चीन की तरफ भी देखने को मिला. इसका ताजा उदाहरण न केवल उनका चीन दौरा है, बल्कि हाल ही में ट्रंप चीनी समकक्ष जिनपिंग की सराहना करते भी दिखे. चीन को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में कुछ नरम दिखाई दे रहा है.

व्यापारिक टकराव और कड़े बयानों के बावजूद दोनों देश बातचीत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि ट्रंप का जितना झुकाव बीजिंग की तरफ है, चीन की तरफ से वहीं झुकाव देखने को नहीं मिल रहा है. ट्रंप के चीन दौरे पर यह तस्वीर साफ दिखी. इससे यह तो साफ है कि अमेरिका फिलहाल एक साथ कई मोर्चों पर टकराव से बचना चाहता है.

दुनिया की किसी भी दुर्गम परिस्थिति में India ने हमेशा राष्ट्र हित को सबसे पहले रखा है. यही कारण है कि ट्रंप के भारी दबाव के बीच न तो India ने रूस से तेल खरीदना बंद किया, न ही अमेरिका की शर्तों पर व्यापार समझौता किया. चूंकि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता हो गया है, ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप पुराने मिजाज में फिर से लौटते हैं? India को टैरिफ किंग कहने वाले ट्रंप का तेवर कैसा होगा, इस पर सबकी नजर रहेगी.

–

केके/वीसी

Share