
Lucknow, 25 मई . उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में फिलहाल सत्ता परिवर्तन नहीं होगा. प्रदेश Government ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही पंचायत चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाए रखने का फैसला किया है.
पंचायतीराज विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद अब 27 मई से पुराने प्रधान ही गांवों में नियमित प्रशासनिक और विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे. प्रमुख सचिव पंचायतीराज अनिल कुमार द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक, वर्ष 2021 में गठित ग्राम पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है.
पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत सामान्य परिस्थितियों में नई पंचायतों का गठन समय से कराया जाना चाहिए, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पूरी न होने की स्थिति में Government ने अंतरिम व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. शासन ने स्पष्ट किया है कि नई ग्राम पंचायतों की पहली बैठक होने तक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक वर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे.
हालांकि, उन्हें केवल सामान्य और नियमित कार्यों के संचालन की अनुमति होगी. किसी भी तरह के नीतिगत या वित्तीय महत्व के बड़े फैसले लेने पर रोक रहेगी. विशेष परिस्थितियों में ऐसे प्रस्ताव जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद ही लागू हो सकेंगे.
पंचायतीराज विभाग के इस फैसले को आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, आरक्षण प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं में समय लग सकता है.
ऐसे में Government गांवों में विकास योजनाओं, साफ-सफाई, पेयजल, मनरेगा और अन्य जरूरी कार्यों को प्रभावित नहीं होने देना चाहती. Political जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में देरी होने पर मौजूदा प्रधानों की सक्रियता और स्थानीय Political समीकरण आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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विकेटी/डीकेपी