दिल्ली में ‘भू आधार’ के लागू होने से सीमा विवादों का होगा अंत : सीएम रेखा गुप्ता

New Delhi, 15 फरवरी . दिल्ली की रेखा गुप्ता Government ने बड़ी पहल करते हुए राजधानी की हर जमीन को खास पहचान देने का फैसला किया है. अब दिल्ली में हर जमीन का ‘आधार कार्ड’ बनाया जाएगा. हर भूखंड को 14 अंकों की अलग पहचान संख्या दी जाएगी, जिसे यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) कहा जाएगा. इससे जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएंगे.

इस निर्णय को लेकर Chief Minister रेखा गुप्ता ने कहा कि इस व्यवस्था से जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. यह केवल नंबर नहीं बल्कि भूमि विवाद और गड़बड़ियों के खिलाफ मजबूत डिजिटल हथियार है. उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम Prime Minister Narendra Modi के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम और क्रांतिकारी प्रयास है. इस प्रणाली को ‘भू आधार’ कहा जाता है.

सीएम रेखा गुप्ता ने योजना की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में इस प्रणाली को लागू करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी. यह योजना India Government के ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग की है, जो देश की राजधानी के लिए बेहद आवश्यक है. Chief Minister के अनुसार, केंद्र Government की यह योजना वर्ष 2016 की है, लेकिन पिछली Governmentों द्वारा इसे लागू नहीं किया गया. अब इसे ‘मिशन मोड’ पर लिया जा रहा है. इसे लागू करने का जिम्मा राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपा गया है, जो भारतीय सर्वेक्षण विभाग से भी सहयोग प्राप्त करेगी.

Chief Minister के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से होने वाले विस्तृत लाभों की बात करें तो यह ‘भू आधार’ भूमि स्वामित्व में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा. इसका 14 अंकों का कोड भू संदर्भित होगा, जिससे जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों को न्यूनतम किया जा सकेगा. यह विभिन्न Governmentी विभागों के बीच भूमि डेटा के समन्वय में मदद करेगा और धोखाधड़ी वाले लेन-देन तथा बहु पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगाएगा. नागरिकों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें अपनी जमीन की पहचान के लिए कई दस्तावेजों के चक्कर नहीं लगाने होंगे, एक ही नंबर से जमीन की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी.

सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. भारतीय सर्वेक्षण विभाग से करीब 2 टेराबाइट का हाई-क्वालिटी भू-स्थानिक डेटा और ड्रोन से ली गई विशेष तस्वीरें (ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज) ली जा रही हैं. इन आंकड़ों की मदद से दिल्ली के ग्रामीण इलाकों सहित उन सभी 48 गांवों के लिए सटीक यूएलपीआईएन तैयार किए जाएंगे, जो पहले से ‘स्वामित्व योजना’ में शामिल हैं. इस योजना के लिए पहले जारी किए गए 132.07 लाख रुपए का प्रबंधन भी आईटी शाखा ने ही किया था. अब Government एक तय प्रक्रिया (एसओपी) और चरणबद्ध समय सीमा के तहत इसे पूरी दिल्ली में लागू करने की तैयारी कर रही है. इस योजना की सफलता का उदाहरण पश्चिमी जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में देखा गया है, जहां पायलट प्रोजेक्ट के तहत 274 यूएलपीआईएन रिकॉर्ड सफलतापूर्वक तैयार किए जा चुके हैं.

उन्होंने इस योजना को दिल्ली के लिए बेहद उपयोगी बताया है और Prime Minister मोदी के विजन का संदर्भ देते हुए कहा कि यूएलपीआईएन प्रणाली Prime Minister जी के ‘डिजिटल इंडिया’ संकल्प को जमीन पर उतारने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है. Prime Minister का विजन है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी रूप से पहुंचे और ‘भू आधार’ इसी दिशा में बड़ा प्रयास है.

Chief Minister ने कहा कि पीएम मोदी ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि एकीकृत और आधुनिक भूमि रिकॉर्ड विकसित India की आधारशिला हैं, जिससे नागरिकों को संपत्ति की सुरक्षा का भरोसा मिलता है और भ्रष्टाचार पर सीधी चोट होती है. दिल्ली Government इसी विजन का अनुसरण करते हुए राजधानी के प्रत्येक नागरिक की भूमि को सुरक्षित और विवाद मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

सीएम रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि दिल्ली Government राजधानी के हर नागरिक की संपत्ति और उसके अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. ‘भू आधार’ केवल नंबर नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और भूमि विवादों के खिलाफ शक्तिशाली डिजिटल हथियार है. अक्सर हम देखते हैं कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, लेकिन अस्पष्ट रिकॉर्ड्स के कारण वे कानूनी विवादों में फंस जाते हैं. ‘विशिष्ट भू खंड पहचान संख्या’ इस अनिश्चितता को समाप्त करेगी. यह ‘भूमि के लिए आधार’ के रूप में काम करेगा, जिससे हर इंच जमीन का डिजिटल हिसाब होगा.

एसके/

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