अमेरिका-ईरान तनाव का असर, ईंधन संकट और महंगाई से जूझता पाकिस्तान : रिपोर्ट

New Delhi, 26 अप्रैल . Pakistan इस समय बढ़ते आर्थिक दबाव से जूझ रहा है. अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे तेल-गैस महंगे हो गए हैं और Pakistan की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और बोझ बढ़ गया है.

‘द न्यूज इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात को संभालने के लिए Pakistan Government कूटनीतिक कोशिशें कर रही है और तनाव कम करने में जुटी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.

स्थिति की अनिश्चितता और होर्मुज स्‍ट्रेट जैसे अहम रास्तों में रुकावट की वजह से ईंधन की सप्लाई कम बनी हुई है और कीमतें ऊंची हैं. इसका सबसे ज्यादा असर एशिया के उन देशों पर पड़ रहा है जो ऊर्जा के लिए बाहरी देशों पर निर्भर हैं.

Pakistan, जो काफी हद तक आयातित ईंधन पर निर्भर है, वहां हाल के हफ्तों में कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है. अभी थोड़ी राहत मिली है, लेकिन हालात अभी भी अस्थिर हैं और अगर तनाव जारी रहा तो कीमतें फिर बढ़ सकती हैं.

इसका असर अब पूरे ऊर्जा सिस्टम पर दिखने लगा है. देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और गैस की कमी की शिकायतें आ रही हैं. महंगे ईंधन का असर अब लोगों के बिजली बिल पर भी दिखने लगा है. बिजली नियामक फरवरी के फ्यूल एडजस्टमेंट के तहत प्रति यूनिट 1.42 रुपए की बढ़ोतरी वसूलने की तैयारी में है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये संकट गर्मियों तक चला, जब बिजली की मांग ज्यादा होती है, तो लोगों पर बोझ और बढ़ सकता है.

ऊर्जा बचाने के लिए Government जो कदम उठा रही है, उन पर भी सवाल उठ रहे हैं. चेनस्टोर एसोसिएशन ऑफ Pakistan का कहना है कि दुकानों को जल्दी बंद करने से सिर्फ दो हफ्तों में लगभग 200 अरब रुपए के कारोबार का नुकसान हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, उनका यह भी कहना है कि संगठित रिटेल दुकानों को ज्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि छोटी और अनौपचारिक मार्केट्स पर इतना असर नहीं पड़ रहा, जिससे बराबरी नहीं रह गई है और असली बचत भी नहीं हो रही. कुल मिलाकर देश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार, इस संकट के चलते तीन करोड़ से ज्यादा लोग फिर से गरीबी में जा सकते हैं, खासकर तब जब खेती के अहम समय में ईंधन और खाद की कमी हो रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी संघर्ष खत्म भी हो जाए, तब भी इसके आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं.

एवाई/एबीएम

Leave a Comment