अस्वस्थ शरीर और अशांत है मन? उत्थित पद्मासन है समाधान

New Delhi, 30 नवंबर . कहते हैं कि स्वास्थ्य ही धन है और स्वस्थ रहेंगे तो मन भी शांत रहेगा. लेकिन, दोनों ही न हों तो? अस्वस्थ शरीर और अशांत मन पूरे दिन का खेल बिगाड़ सकते हैं. ऐसे में योग एक्सपर्ट योगासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं. एक्सपर्ट उत्थित पद्मासन को एक बेहतरीन विकल्प बताते हैं.

उत्थित पद्मासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर कई छोटी-बड़ी समस्याओं की छुट्टी की जा सकती है. मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा उत्थित पद्मासन को बेहद लाभकारी आसन बताता है. यह आसन न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ाता है, बल्कि एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है.

उत्थित पद्मासन के अभ्यास से कई फायदे मिलते हैं. इसके करने की सही विधि के बारे में योगा इंस्टीट्यूट जानकारी देता है. इसके लिए सबसे पहले शांत जगह पर पद्मासन (कमल आसन) की मुद्रा में आराम से बैठ जाएं. दोनों हथेलियों को शरीर के बगल में जमीन पर मजबूती से रखें. सांस लेते हुए हाथों पर पूरा भार डालें और कूल्हों सहित पूरे शरीर को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाएं. इस दौरान गर्दन और सिर को बिल्कुल सीधा और नजर सामने रखें. जितनी देर संभव हो, इस स्थिति में संतुलन बनाए रखें. इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को वापस जमीन पर लेकर आएं.

उत्थित पद्मासन के अभ्यास से एक-दो नहीं, बल्कि कई फायदे मिलते हैं. इससे खास तौर पर कलाइयों, कोहनियों, कंधों और बाजुओं की ताकत बढ़ती है. कोर मसल्स मजबूत होती हैं. रीढ़ की हड्डी लचीली और सीधी रहती है. संतुलन और एकाग्रता में सुधार होता है. नाभि केंद्र (मणिपुर चक्र) जागृत होता है, जो छात्रों के लिए विशेष महत्व रखता है. लंबे समय तक अभ्यास से पूरे शरीर में हल्कापन और स्थिरता आती है.

यह आसन बेहद फायदेमंद है. लेकिन कुछ लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए. कलाई, कोहनी, कंधे में चोट या दर्द हो, कमर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या हो तो इस आसन से परहेज करना चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोगी, प्रेग्नेंट महिलाओं और हाल में पेट का ऑपरेशन हुआ हो तो योग प्रशिक्षक से सलाह लेने के बाद ही उत्थित पद्मासन का अभ्यास करना चाहिए.

एमटी/एबीएम

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