क्वेटा में दो बलूच महिलाओं और उनके मासूम बच्चों को जबरन उठाने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने की निंदा

क्वेटा, 20 अगस्त . Pakistan के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में दो बलूच महिलाओं और उनके नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर Pakistanी सुरक्षा बलों द्वारा जबरन गायब किए जाने का मामला सामने आया है. इस घटना की कई प्रमुख बलूच मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने कड़ी निंदा की है.

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 27 वर्षीय उमैरा बलूच, उनकी आठ वर्षीय बेटी परीसा, 28 वर्षीय नजमा बलूच और उनका डेढ़ साल का बेटा जाकिर Wednesday को क्वेटा के गशकोरी टाउन स्थित उनके घरों से कथित तौर पर Pakistan के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) और फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के जवानों द्वारा उठाए गए. घटना के बाद से चारों का कोई पता नहीं चल सका है.

बलूच विमेंस फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों का अपहरण केवल व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि कानून द्वारा प्रदत्त बुनियादी सुरक्षा पर गंभीर हमला है. संगठन ने विशेष रूप से डेढ़ साल के बच्चे के कथित जबरन गायब किए जाने को बेहद भयावह बताया.

फोरम ने कहा कि किसी भी पारदर्शी और कानूनी न्यायिक प्रक्रिया के बिना नाबालिगों को हिरासत में लेना उनके मौलिक अधिकारों और बच्चों को प्राप्त कानूनी संरक्षण का गंभीर उल्लंघन है. संगठन का आरोप है कि बलूच महिलाओं और बच्चों को लगातार निशाना बनाया जाना बलूचिस्तान में जवाबदेही की कमी और दंडमुक्ति की संस्कृति को दर्शाता है.

वहीं, बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (एचआरसीबी) ने भी घटना पर गहरी चिंता जताई. संगठन ने कहा कि नाबालिगों को मनमाने ढंग से स्वतंत्रता से वंचित करना और उनका कथित जबरन गायब किया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और बाल अधिकार सम्मेलन के तहत गंभीर चिंता का विषय है.

एचआरसीबी ने Pakistan Government से उमैरा, नजमा, परीसा और जाकिर का तत्काल पता सार्वजनिक करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और बिना शर्त रिहा करने की मांग की. साथ ही परिवारों को उनकी स्थिति की जानकारी देने और उन्हें किसी भी तरह की यातना या गैर-न्यायिक नुकसान से सुरक्षित रखने की अपील की.

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में इस तरह की कार्रवाई करने वाले सुरक्षा बल बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं. संगठन ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का जबरन गायब किया जाना कानून के शासन के प्रति पूरी तरह अनादर को दर्शाता है.

बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने भी घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आठ साल की बच्ची और डेढ़ साल के मासूम बच्चे का क्या अपराध हो सकता है. उनका एकमात्र “अपराध” बलूच होना है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य एजेंसियों द्वारा महिलाओं और बच्चों को जबरन गायब करना सामूहिक सजा का सबसे क्रूर रूप है.

डीएससी

Leave a Comment