ट्रायल में रिजेक्ट होने के बाद दिल्ली से केरल कैसे पहुंचे संजू सैमसन? विकेटकीपर ने खुद सुनाई कहानी

New Delhi, 4 जुलाई . टी20 विश्व कप 2026 में India को चैंपियन बनाने में यादगार भूमिका निभाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने बताया है कि कैसे उनके पिता विश्वनाथन ने उनकी क्रिकेट के लिए अचानक परिवार को दिल्ली से केरल शिफ्ट करने का फैसला लिया था. सैमसन ने कहा कि उनके पिता का फैसला उनके करियर के लिए अहम मोड़ साबित हुआ.

सैमसन ने Saturday को जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में कहा, “स्कूल के दिनों में, मैं दोस्तों को डीडीसीए जैकेट पहने और दिल्ली की राज्य क्रिकेट टीम के लिए खेलने की बात करते देखता था. इससे मुझे प्रेरणा मिली. मैं भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करना चाहता था. मैं ट्रायल के लिए गया, स्टेट कैंप में गया और रन बनाए.”

उन्होंने कहा, “दो-तीन बार मैं कैंप तक पहुंचा लेकिन स्टेट टीम में कभी जगह नहीं बना पाया. प्रतियोगिता बहुत मुश्किल थी. एक दिन ट्रायल खत्म होने के बाद टीम की सूची जारी हुई. मेरा नाम उसमें नहीं था. हम चुपचाप घर लौट आए. जैसे ही हम घर पहुंचे, मेरे पापा ने मेरी मां से कहा, ‘हमें केरल जाना होगा. हम शिफ्ट हो रहे हैं.’ मेरी मां ने कहा, ‘बच्चे अभी सिर्फ छठी क्लास में हैं. उन्हें दसवीं पूरी करने दो.’”

विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा, “मेरे पापा ने कहा, ‘नहीं, हमें अभी जाना है. अपना सामान पैक करो. मैं तीन दिन में टिकट बुक कर रहा हूं.’ उन्होंने तुरंत यह फैसला लिया. मुझे याद है, हम सब ट्रेन में चढ़े. फिर हम केरल पहुंचे और मैंने केरल के लिए खेलना शुरू किया. इस तरह केरल स्टेट टीम के लिए मेरा क्रिकेट का सफर शुरू हुआ.”

सैमसन ने याद किया कि कैसे जीटीबी नगर में Police कॉलोनी में बड़े होते हुए उन्हें क्रिकेट से प्यार हुआ.

उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, दिल्ली ने मेरी जिंदगी में बहुत बड़ा रोल निभाया है. मेरी जिंदगी दिल्ली से शुरू हुई. मेरे पिता दिल्ली Police फुटबॉल टीम में थे. वह सुबह और शाम अभ्यास के लिए जाते थे. उसी समय से, मुझे खेल से प्यार हो गया. मुझे लगा कि मैं एक दिन खिलाड़ी बनना चाहता हूं. मैं Police क्वार्टर में रहता था. वहां, हर जगह क्रिकेट खेला जाता था. बचपन से ही क्रिकेट ने मुझे अपनी ओर खींचा. मैं अपने दोस्तों को इकट्ठा करता था और हम Police कॉलोनी में सड़क के बीच में खेलते थे, जिसके दोनों तरफ क्वार्टर थे.”

सैमसन ने कहा, “हम स्टंप लगाकर वहीं खेलते थे. इसकी शुरुआत टेनिस बॉल से गली क्रिकेट से हुई थी. हमारा अपना नियम था. मेरे पापा ने भी देखा कि मुझे क्रिकेट में मजा आ रहा है. उन्होंने कभी मुझे फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया. वह हमें फुटबॉल खेलने ले जाते थे. हम अब भी खेलते हैं, लेकिन उन्हें लगता था कि क्रिकेट का भविष्य अच्छा है. उन्होंने मुझसे कहा, ‘मैंने तुम्हें बैटिंग करते देखा और मुझे लगा कि तुममें प्रतिभा है.’ इसलिए, उन्होंने मुझे और मेरे भाई को फुटबॉल के बजाय क्रिकेट खेलने को कहा.”

विकेटकीपर बल्लेबाज ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (पहले फिरोज शाह कोटला) में एक अभ्यास सत्र की बहुत प्यारी याद शेयर की, जो उनके पापा के Police ड्यूटी पर होने की वजह से हुआ था.

उन्होंने कहा, “बचपन में, हम एकेडमी जाते थे और स्कूलों में अभ्यास करते थे. एक दिन, मेरे पापा ने कहा कि वह मुझे अभ्यास के लिए फिरोज शाह कोटला ले जाएंगे. हम अभ्यास के लिए नेट्स पर गए. हम अपने पूरे सफेद कपड़ों में तैयार हुए. हम सब बस से फिरोज शाह कोटला गए. मेरे पापा की वहां ड्यूटी थी और उन्होंने किसी से अनुरोध किया कि हमें एक घंटा अभ्यास करने दें. मेरे भाई, पापा और मैंने एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया. मुझे नहीं पता कि मेरे पापा ने यह कैसे किया, लेकिन आजकल वे ऐसी चीजों की इजाजत नहीं देते.”

पीएके

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