जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर Supreme Court में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

New Delhi, 8 जनवरी . ‘कैश कांड’ मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए संसद में चल रही कार्यवाही से जुड़ी याचिका पर Supreme Court ने सुनवाई पूरी कर ली है और अब फैसला सुरक्षित कर लिया गया है. Supreme Court ने Monday को दोनों पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने को कहा.

इसके साथ ही जस्टिस यशवंत वर्मा ने Lok Sabha स्पीकर द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के सामने पेश होने की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की थी. लेकिन, Supreme Court ने उनकी यह मांग ठुकरा दी. जस्टिस वर्मा को अब तय तारीख 12 जनवरी को ही कमेटी के सामने पेश होना होगा और कमेटी के सामने अपनी बात रखनी होगी.

जस्टिस यशवंत वर्मा ने Supreme Court में याचिका दाखिल की थी. इसमें उन्होंने Lok Sabha स्पीकर की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय समिति को चुनौती दी. उनका कहना था कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत किसी जज को हटाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है जब दोनों सदन, यानी Lok Sabha और राज्यसभा, प्रस्ताव को स्वीकार करें और उसके बाद एक संयुक्त समिति बनाई जाए. लेकिन इस मामले में सिर्फ Lok Sabha ने प्रस्ताव पारित किया है, जबकि राज्यसभा में यह अभी लंबित है. इसलिए सिर्फ Lok Sabha स्पीकर द्वारा समिति बनाना कानून के खिलाफ है.

जस्टिस वर्मा का यह भी कहना था कि 21 जुलाई को जब उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था, तब आगे की जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति बननी चाहिए थी. केवल Lok Sabha की तरफ से समिति बनाना प्रक्रिया में गड़बड़ी है.

गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित Governmentी बंगले में 14-15 मार्च 2025 की रात आग लग गई थी. आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए. उस वक्त जस्टिस वर्मा बंगले में मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने Police और फायर ब्रिगेड को सूचना दी. जांच में यह कैश अनएकाउंटेड बताया गया.

इस घटना के एक हफ्ते बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है.

पीआईएमएम

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