
चंडीगढ़, 26 जून . शिरोमणी अकाली दल की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा सांसद बीबा हरसिमरत कौर बादल ने Friday को Maharashtra के Chief Minister देंवेंद्र फडणवीस से तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड के स्वायत्त स्वरूप को बरकरार रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि उन्हें सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बोर्ड को Government द्वारा नामित मैंबरों को भरने वाले मसौदा कानून को वापिस लेना चाहिए.
Chief Minister को लिखे एक पत्र में बठिंडा सांसद ने कहा कि सिख समुदाय इस बात से नाराज है कि सिख समुदाय, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) या हजूरी सचखंड दीवान की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना राज्य द्वारा नियुक्त कमेटी की सिफारिशों पर तख्त बोर्ड के स्वरूप में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि चूंकि सिख संगठनों से कोई सलाह-मशवरा नहीं किया गया, इसीलिए यह धारणा बन रही है कि यह कदम बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म करने की कोशिश है. बीबा बादल ने Chief Minister से कहा कि दुनिया भर से सिख इसे समुदाय को नुकसान पहुंचाने के लिए पवित्र स्थान को पूरा नियंत्रण लेने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं.
बीबा हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि समुदाय में इस बात पर आम सहमति है कि तख्त श्री हजूर साहिब की ‘मर्यादा’ (आचार संहिता), प्रबंधन, और धार्मिक स्वायत्ता को प्रभावित करने वाला कोई भी फैसला एकतरफा नहीं लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे पहले फरवरी 2024 में Maharashtra Government ने पवित्र स्थान को नियंत्रित करने वाले अधिनियम में संशोधन करते हुए बोर्ड के 17 में से 12 सदस्यों को Government द्वारा सीधे नामांकन के माध्यम से मनोनीत करने की अनुमति दी थी. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी का प्रतिनिधित्व कम कर दिया गया था और मुख्य खालसा दीवान और हजूर सचखंड दीवान का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था. हालांकि एसजीपीसी और स्थानीय सिख संगठनों के भारी विरोध के बाद इस संशोधन को वापस ले लिया गया था, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि Government ने नए अधिनियम बोर्ड के ढांचे में इसी तरह के बदलाव लाने का फैसला किया है.
बीबा बादल ने Chief Minister से सिख समुदाय को परंपरा के अनुसार अपने मामलों का प्रबंधन करने की अनुमति देने की अपील करते हुए कहा कि तख्त प्रबंधन ने पुराने अधिनियम को निरस्त करने के Maharashtra Government के फैसले के खिलाफ एक ‘गुरुमाता’ (सामूहिक आदेश) भी जारी किया था. उन्होंने कहा कि इसके अनुसार नए मसौदा कानून को वापस लेकर पुराने अधिनियम को लागू रहने दिया जाना चाहिए. यह सिख समुदाय में बढ़ रहे तनाव को कम करने का काम करेगा क्योंकि समुदाय का मानना है कि Maharashtra Government को उनके धार्मिक मामलों में हस्तक्षेपनहीं करने से गुरेज करना चाहिए.
Chief Minister से इस मुददे का जल्द से जल्द हल करने का अनुरोध करते हुए बीबा बादल ने कहा कि सात दशक पुराना अधिनियम- नादेंड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनि1956—सिख समुदाय को श्री गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े धार्मिक स्थान के प्रबंधन में पूर्ण स्वायत्ता प्रदान करता है. उन्होने आगे कहा कि नया प्रस्तावित अधिनियम इस स्वायत्ता को छीनकर इसे पर Governmentी नियंत्रण स्थापित करना चाहता है. यह सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ किया जा रहा है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए.
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एमएस/