गुजरात: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग महिला से 55 लाख की ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

Ahmedabad, 12 मई . Ahmedabad साइबर क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में शामिल था, जिसमें एक बुजुर्ग महिला से 55.50 लाख रुपए की ठगी की गई थी. आरोपियों ने फर्जी पहचान और नकली कानूनी दस्तावेजों के जरिए महिला को डराकर पैसे ऐंठे थे.

Police के अनुसार, यह मामला साइबर क्राइम Police स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (भारतीय न्याय संहिता, 2023) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया, जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को Mumbai के कोलाबा Police स्टेशन का ‘रणवीर सिंह’ बताकर पेश किया. उन्होंने कहा कि महिला एक फ्रॉड केस में शामिल है और उसके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है.

इसके बाद आरोपियों ने उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की बात कहकर एक महीने तक कोर्ट में पेश किए जाने का झांसा दिया. डर पैदा करने के लिए उन्होंने नकली First Information Report , वित्त मंत्रालय के फर्जी पत्र और Supreme Court के नाम से बनाए गए दस्तावेज भी भेजे.

Police ने बताया कि आरोपियों ने महिला से उसकी संपत्ति की जांच के नाम पर बैंक डिटेल्स हासिल कीं और उसे पैसे ट्रांसफर करने तथा गोल्ड लोन लेने के लिए मजबूर किया. कुल मिलाकर 55,50,094 रुपए अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ठगे गए.

साइबर क्राइम शाखा के अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर फर्जी पहचान बनाकर पीड़िता को डराया और मानसिक दबाव बनाकर पैसे वसूले.

जांच में सामने आया कि यह ठगी एक संगठित नेटवर्क के जरिए की गई थी. आरोपी Haryana और दिल्ली से गिरफ्तार किए गए. उनकी पहचान गुरुग्राम निवासी सोनू कुमार और दिल्ली के कपासहेड़ा क्षेत्र निवासी प्रदीप कुमार के रूप में हुई है.

दोनों आरोपियों ने दिल्ली के एक होटल में वसीम खान नामक सहयोगी से मुलाकात कर ठगी के पैसों के लेनदेन की योजना बनाई थी. इस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपए के ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया.

जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ Maharashtra, पश्चिम बंगाल, Gujarat, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई साइबर शिकायतें दर्ज हैं.

Police ने कहा कि यह गिरोह Police और केंद्रीय एजेंसियों का नाम लेकर फर्जी गिरफ्तारी का डर दिखाता था और इसी बहाने लोगों से पैसे ठगता था.

अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी Police या जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी नहीं करती और न ही ओटीपी, पिन या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की मांग करती है. साथ ही किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप इंस्टॉल न करने की सलाह दी गई है.

एएमटी/डीकेपी

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