गुजरात पुलिस ने शुरू किया 28 दिवसीय ‘सुरक्षित शक्ति’ अभियान, महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस

गांधीनगर, 17 अगस्त . Gujarat Police ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 28 दिवसीय राज्यव्यापी ‘सुरक्षित शक्ति’ अभियान शुरू किया है. इस पहल में निवारक Policeिंग, डिजिटल सुरक्षा जागरूकता, पीड़ित सहायता, सामुदायिक भागीदारी और प्रदर्शन-आधारित निगरानी को शामिल किया गया है.

यह अभियान उपChief Minister हर्ष संघवी के उस निर्देश के बाद शुरू किया गया है जिसमें कहा गया था कि ‘महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और उनके खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए.’

Police महानिदेशक (डीजीपी) जीएस मलिक के पर्यवेक्षण में, राज्य Police डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और लड़कियों को होने वाले खतरों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी.

Police महानिदेशक (सीआईडी क्राइम और रेलवे) केएलएन राव के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल को रोकथाम और सुरक्षा, जागरूकता और सशक्तिकरण, सहायता और प्रवर्तन, तथा स्थिरता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

इसमें Police इकाइयों के प्रदर्शन की निगरानी और मापने योग्य संकेतकों के माध्यम से परिणामों का आकलन करने की एक प्रणाली भी शामिल है.

Police के अतिरिक्त महानिदेशक (सीआईडी ​​अपराध, महिला प्रकोष्ठ) अजय चौधरी ने कहा कि हमने साक्ष्य-आधारित Policeिंग और पहल की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए मापने योग्य प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) प्रस्तावित किए हैं.

रोकथाम और सुरक्षा उपायों के तहत, Police इकाइयों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, गश्त बढ़ाने और महिलाओं को प्रभावित करने वाले अपराधों और उत्पीड़न के खिलाफ निवारक हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया है.

यह अभियान जवाबदेही और साक्ष्य संग्रह में सुधार के लिए दृश्यमान Policeिंग, बॉडी-वियर कैमरे और अन्य तकनीकी उपकरणों के अधिक उपयोग को भी प्रोत्साहित करेगा.

डिजिटल सुरक्षा अभियान का एक अन्य महत्वपूर्ण घटक है. Police महिलाओं और लड़कियों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्स्टॉर्शन, डीपफेक, ओटीपी धोखाधड़ी और क्यूआर-कोड घोटालों सहित ऑनलाइन खतरों के बारे में शिक्षित करेगी.

चौधरी ने कहा कि अभियान का एक प्रमुख फोकस जागरूकता और डिजिटल सुरक्षा है. Police महिलाओं और लड़कियों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्स्टॉर्शन, डीपफेक, ओटीपी धोखाधड़ी और क्यूआर-कोड घोटालों जैसे उभरते ऑनलाइन खतरों के बारे में शिक्षित करेगी.

इस अभियान के तहत महिलाओं को आपातकालीन और सहायता तंत्रों से भी परिचित कराया जाएगा, जिनमें हेल्पलाइन नंबर 181, 112 और 1930 और वन स्टॉप सेंटर शामिल हैं.

इससे महिलाओं को आत्मरक्षा कौशल हासिल करने और अपने कानूनी अधिकारों को समझने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

एमएस/

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