
Bhopal , 9 जुलाई . नर्मदा नदी पर स्थित सरदार सरोवर बांध को लेकर Madhya Pradesh और Gujarat Government के बीच हुए समझौते पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस समझौते में राज्य के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए Government से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है. Madhya Pradesh कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने Thursday को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि वार्ता का मुख्य विषय Madhya Pradesh की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से जुड़ा गंभीर विवाद है.
उन्होंने आरोप लगाया कि Madhya Pradesh Government ने घुटने टेक दिए हैं और प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों तथा Madhya Pradesh के वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की है. राज्य Government को वस्तु स्थिति स्पष्ट करने के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए . कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने संवाददाताओं से कहा है कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह Madhya Pradesh में है. इसलिए नर्मदा पर पहला अधिकार Madhya Pradesh की जनता का है. इसके बावजूद सरदार सरोवर परियोजना का सबसे अधिक नुकसान भी Madhya Pradesh ने ही उठाया.
उन्होंने बताया कि 230 प्रभावित गांवों में से 178 गांव Madhya Pradesh में जबकि केवल 19 गांव Gujarat में हैं. बांध के कारण Madhya Pradesh के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए जबकि Gujarat में यह संख्या लगभग 4,000 परिवार है. Madhya Pradesh ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि, आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय क्षति का बोझ उठाया है. पटवारी ने कहा कि इन्हीं नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तत्कालीन राज्य Government ने 76,69 करोड़ का दावा प्रस्तुत किया था.
आरोप है कि मोहन यादव के Chief Minister बनने के बाद इस बड़े दावे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट Madhya Pradesh Government ने आश्चर्यजनक रूप से Gujarat को लगभग 550 करोड़ देने पर सहमति जता दी. Government दावा कर रही है कि उसने 1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर 231 करोड़ में निपटा दिया और 1,268 करोड़ की बचत की है. यह समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और किन अधिकारियों की भूमिका रही, इसका पूरा सच प्रदेश की जनता के सामने आना चाहिए.
उन्होंने Government से सवाल किया है कि सरदार सरोवर बांध के लगभग 7,500 करोड़ के दावे को छोड़कर 1,250 से 1,500 करोड़ के बीच समझौता कैसे किया गया? इतने बड़े निर्णय पर विधानसभा, विपक्ष या प्रदेश की जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? कांग्रेस इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग करती है.
पटवारी ने वर्ष 2019 की उस घटना की याद दिलाई जब आरोपों के अनुसार Prime Minister Narendra Modi का जन्मदिन मनाने के लिए सरदार सरोवर बांध को उसकी पूरी क्षमता तक भर दिया गया था,जिसके कारण Madhya Pradesh के सैकड़ों गांव डूब गए और प्रदेश को भारी मानवीय तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में Chief Minister के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है, Governmentी संपत्तियां बेची जा रही हैं और प्रदेश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
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एसएनपी/पीएम