सरकार बदलने जा रही होलसेल प्राइस इंडेक्स का आधार वर्ष, लॉन्च करेगी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स

New Delhi, 2 जून . Government थोक मूल्य सूचकांक यानी होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) के आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 करने जा रही है. इसके साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) भी लॉन्च करने जा रही है, जिसे India की महंगाई मापने की प्रणाली को आधुनिक और अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इसके अलावा, Government ने इस विषय पर Tuesday को मीडिया को ब्रीफिंग के लिए आमंत्रित किया है, जिसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो संबोधित करेंगे.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा, “हमने डब्ल्यूपीआई 2022-23 के आंकड़ों का उपयोग किया है, जो हमें आंतरिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों में कोई संशोधन न करना पड़े. हमें उम्मीद है कि ये आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाएंगे.”

उन्होंने बताया कि वर्तमान डब्ल्यूपीआई शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है, जबकि संशोधित शृंखला में इसे बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा.

सौरभ गर्ग ने कहा कि नया सूचकांक शुरू होने के बाद भी डब्ल्यूपीआई से आउटपुट पीपीआई में बदलाव तुरंत नहीं किया जाएगा. Government पहले नई शृंखला की स्थिरता और विश्वसनीयता का अध्ययन करेगी, उसके बाद ही इसे व्यापक स्तर पर अपनाने का निर्णय लिया जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि India में डब्ल्यूपीआई और आउटपुट पीपीआई के बीच बहुत अधिक अंतर होने की संभावना नहीं है, क्योंकि डब्ल्यूपीआई की गणना के लिए पहले से ही ऐसी पद्धति अपनाई जाती है जो दोनों के बीच अंतर को सीमित रखती है.

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही सांख्यिकी मंत्रालय ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जारी किया था.

मंत्रालय ने बताया था कि मूल्य आधारित वस्तुओं की गणना के लिए नए आधार वर्ष वाले अद्यतन डब्ल्यूपीआई डिफ्लेटर का पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका है.

इस साल फरवरी में Government ने कहा था कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधार वर्ष 2022-23 किया जा रहा है, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का आधार वर्ष 2024 किया जा रहा है और आईआईपी का आधार वर्ष भी 2022-23 किया जा रहा है. इसके साथ ही India की सांख्यिकीय प्रणाली का व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है.

Government के अनुसार, “डब्ल्यूपीआई के आधार वर्ष में संशोधन का काम भी जारी है. जब तक नया डब्ल्यूपीआई उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा डब्ल्यूपीआई का उपयोग डिफ्लेटर के रूप में किया जाता रहेगा.”

इसके अलावा, मंत्रालय निकट भविष्य में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को भी शामिल करने की योजना बना रहा है.

पीपीआई उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है, जिन्हें उत्पादक खरीदते और बेचते हैं. इससे उत्पादन स्तर पर कीमतों के रुझान को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है और महंगाई के आकलन को अधिक सटीक बनाया जा सकता है.

डीबीपी

Leave a Comment