90 के दशक में डांसिंग करियर अच्छा विकल्प नहीं माना जाता था: गीता कपूर

Mumbai , 25 जून . कोरियोग्राफर और टेलीविजन पर्सनालिटी गीता कपूर ने 90 के दशक की शुरुआत में Bollywood इंडस्ट्री में एक डांसर के तौर पर अपने शुरुआती दिनों को याद किया, जब डांसिंग को करियर का एक अच्छा विकल्प नहीं माना जाता था.

गीता कपूर ने के साथ एक खास बातचीत में कहा कि पिछले कुछ सालों में हालात बहुत बदल गए हैं और अब डांस को एक सही और फायदेमंद करियर के तौर पर देखा जाता है. उन्होंने कहा, “डांस को लेकर सोच बदली है. अब इसे करियर के विकल्प के तौर पर देखा जाता है. जब हम डांस करते थे, तब यह करियर का विकल्प नहीं था.”

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए गीता ने बताया कि जैसे-जैसे इस फील्ड में मौके बढ़े, पैसे की बात भी एक मोटिवेशन बन गई.

उन्होंने समझाया, “हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हम पैसे कमाना चाहते थे. उस समय हमें काम मिल रहा था, लेकिन मैं यह नहीं कहूंगी कि यह सिर्फ पैसे कमाने के बारे में था. हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हमें यह पसंद था. यह एक शौक था जिससे करियर बदल गया.”

मशहूर कोरियोग्राफर ने बताया कि जब उन्होंने डांस सीखना शुरू किया था तो कभी नहीं सोचा था कि यह उनका पेशा बन जाएगा.

गीता ने याद करते हुए कहा, “मेरे लिए डांस एक शौक था. मेरी मां ने मुझे ऐसी क्लास में भेजा, जहां मैंने लोक नृत्य, कथक और भरतनाट्यम की बुनियादी बातें सीखीं. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस पेशे से पैसे कमाऊंगी, इसमें करियर बनाऊंगी या कोरियोग्राफर बनूंगी.”

गीता कपूर ने कहा, “जब मैंने देखा कि यह कमाई का जरिया हो सकता है, खासकर जावेद जाफरी के साथ काम करने के बाद, तो मुझे एहसास हुआ कि कमाई बढ़ रही है. पहले हम 500 या 1,000 रुपए के लिए परफॉर्म करते थे, और तब 1,000 रुपए भी बड़ी रकम मानी जाती थी.”

गीता कपूर की बात करें तो यह डांसर लगभग तीन दशकों से Bollywood इंडस्ट्री का हिस्सा रही हैं. उन्होंने फराह खान के कई सुपरहिट गानों में उनकी मदद की है.

सुपरहिट फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ का मशहूर गाना ‘तुझे याद ना मेरी आई’ गीता कपूर पर फिल्माया गया था.

ओपी/डीकेपी

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