
Lucknow, 15 अगस्त . स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने Prime Minister Narendra Modi के स्वतंत्रता दिवस संबोधन, महात्मा गांधी की विचारधारा और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन इस अवसर पर देश के सामने मौजूद कई सवालों पर भी विचार करने की जरूरत है.
महात्मा गांधी के विचारों का जिक्र करते हुए हुसैन दलवई ने कहा कि गांधी जी ने जिस रास्ते और विचारधारा का मार्ग दिखाया था, आज भी जहां लोग उस रास्ते को अपना रहे हैं, वहां गांधी के विचार जीवित हैं. देश में हुए आंदोलनों और छात्रों की भागीदारी से एक बार फिर यह देखने को मिला कि गांधी के विचार आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं. देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और यह अवसर कई सवाल भी सामने लेकर आता है. दलवई ने आजादी के बाद देश के विकास में कांग्रेस Governmentों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि बिजली, बड़े बांध, सड़कों, पुलों और विभिन्न संस्थाओं के निर्माण सहित देश के विकास के लिए बड़े स्तर पर काम किया गया. आजादी के बाद देश में कई महत्वपूर्ण संस्थाएं खड़ी हुईं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया गया.
हुसैन दलवई ने संविधान को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बताते हुए कहा कि India संविधान के जरिए चलेगा, यह देश की मूल भावना है. उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने भी बाबासाहेब आंबेडकर का सम्मान किया और संविधान निर्माण में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना. उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने कड़ी मेहनत के बाद देश को संविधान दिया और संविधान की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है. आज देश में यह देखने की जरूरत है कि संविधान में दिए गए अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को किस तरह सुरक्षित रखा जा रहा है.
Prime Minister मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर दलवई ने कहा कि अगर Prime Minister कांग्रेस के समय हुए कामों से आगे जाने की बात करते हैं तो यह अच्छी बात है. हालांकि, उन्होंने Government को संविधान में नागरिकों को मिले अधिकारों के प्रति सावधान रहने की नसीहत दी. दलवई ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने और संघर्ष करने की स्वतंत्रता देता है. इस आजादी पर किसी को नजर नहीं लगानी चाहिए. Government की ओर से अलग-अलग मामलों में लोगों पर दबाव बनाने और Police के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
उमर खालिद और शरजील इमाम का उदाहरण देते हुए कांग्रेस नेता ने उनकी लंबे समय से चल रही कानूनी स्थिति पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यदि एक तरफ संविधान की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ संविधान में दिए गए अधिकारों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों पर भी ध्यान देना चाहिए. आरएसएस को घेरते हुए उन्होंने कहा कि पहले आरएसएस के लोग तिरंगा नहीं लगाते थे, लेकिन अब तिरंगा लगाने लगे हैं तो यह अच्छी बात है. उन्होंने यह भीकहा कि केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं बल्कि सही मायने में देश और संविधान के लिए काम करना जरूरी है. स्वतंत्रता दिवस सभी लोगों को मिलकर मनाना चाहिए और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए.
लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर दलवई ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है और इसे सभी गाते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी अन्य अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ गाया जाता रहा है. उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि ‘वंदे मातरम’ को आज पहली बार गाए जाने की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए. दलवई ने कहा कि कांग्रेस के दौर में भी ‘वंदे मातरम’ को कार्यक्रमों में स्थान दिया जाता था. अगर आज इसे प्रमुखता से गाया गया है तो इसे अच्छी बात माना जा सकता है, लेकिन इसे नई शुरुआत के तौर पर पेश करना सही नहीं है.
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पीएसके