
कोलकाता, 17 मई . पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद सत्ता से टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की विदाई और उनके शासन के दौरान कानून व्यवस्था को लेकर जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कई सवालों के जवाब दिए. 2012 में तत्कालीन Chief Minister ममता बनर्जी का एक कार्टून सर्कुलेट करने के आरोप में गिरफ्तार हुए जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने के साथ बातचीत में अपने केस के अलावा बंगाल के वर्तमान और भविष्य को लेकर बातचीत की.
अंबिकेश महापात्रा ने के साथ बातचीत में पश्चिम बंगाल की पूर्व तृणमूल कांग्रेस Government पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 2012 के चर्चित कार्टून और ईमेल फॉरवर्ड मामले में गिरफ्तार हुए जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा कि उनके खिलाफ चलाया गया मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि फ्रीडम ऑफ स्पीच और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला था. अंबिकेश महापात्रा ने लंबी बातचीत में प्रमुख सवालों पर अपनी राय रखी.
सवाल: कार्टून सर्कुलेट करने के आरोप में आपकी गिरफ्तारी और 11 साल के संघर्ष को कैसे देखते हैं?
जवाब: प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा कि मेरे खिलाफ एक षड्यंत्र था. इस मामले में सत्ताधारी टीएमसी पार्टी की गुंडागर्दी Police प्रशासन और निचली आपराधिक अदालत के साथ मिली हुई थी. वे सब मिलकर काम कर रहे थे. यह सब ममता बनर्जी की शह पर हो रहा था. उस मामले पर आए अंतिम फैसले में कहा गया कि आईटी एक्ट की धारा 66ए असंवैधानिक है और अब से इसे भारतीय कानून की किताब से हटा दिया गया है. यह अंतिम फैसला था. उस समय, Supreme Court ने यह भी कहा था कि India में धारा 66ए से जुड़े जितने भी मामले चल रहे हैं, उन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए. हमारा केस खत्म होना चाहिए था लेकिन वो नहीं हुआ. संविधान के द्वारा मानव को मिले अधिकारों का हनन किया गया. यह इस आपराधिक मामले का पूरा घटनाक्रम है. कुल मिलाकर, इससे यह संकेत मिलता है कि यह सत्ताधारी दल के ‘सुप्रीमो’ द्वारा रची गई एक साजिश थी. यह साजिश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने की थी और भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक मानवाधिकारों पर प्रहार करने की थी.
सवाल: आपकी गिरफ्तारी के खिलाफ जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों और बुद्धिजीवियों ने विरोध जताया, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: जी बिल्कुल, मेरे समर्थन और गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध जताया गया. उन्होंने कहा कि ममता Government की 15 साल के शासन में इस तरह की कई गिरफ्तारियां हुई. पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक किसान शिलादित्य चौधरी के बारे में जानते होंगे. ममता बनर्जी ने उन्हें भी गिरफ्तार करवाया था और उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला आज भी चल रहा है. उन्हें अगस्त 2012 में गिरफ्तार किया गया था. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी के कुशासन को लेकर जनता में रोष था, इसीलिए जनता ने उन्हें इस विधानसभा चुनाव में सत्ता से उखाड़कर फेंक दिया.
सवाल: 15 साल के शासन के बाद बंगाल से ममता बनर्जी के बाहर होने के पीछे क्या वजह रही होगी?
जवाब: प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा कि 2011 से पहले जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं तो वे कहती थीं कि बदलाव चाहिए, बदला नहीं चाहिए. इसके साथ ही, एक और नारा भी था, ‘गणतंत्र चाहिए, दलतंत्र नहीं चाहिए’. ‘गणतंत्र’ से उनका मतलब था कि वह एक लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहती थीं लेकिन वह तो बस उनका एक नारा भर था. उनके काम और उनका प्रशासन एक ‘वन-वूमन पार्टी’ (एक-महिला वाली पार्टी) और एक ‘वन-वूमन एडमिनिस्ट्रेशन’ (एक-महिला वाला प्रशासन) की तरह चल रहा था और हर काम सिर्फ एक ही व्यक्ति करता था यानी कि ममता बनर्जी. ममता बनर्जी के नेतृत्व में सभी Police थानों पर कब्जा कर लिया गया था. कानून का घोर उल्लंघन किया गया.
1998 से अपनी पार्टी टीएमसी में वह हमेशा पार्टी की अध्यक्ष रही हैं. वहां कोई लोकतंत्र नहीं है. अपनी पार्टी में वह एक तानाशाह हैं. 2011 से प्रशासन में भी यही पैटर्न देखने को मिला है. यह लोकतंत्र के लिए या India गणराज्य जैसे देश के लिए सही नहीं है.
उन्होंने बंगाल की Political संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर और राजा राममोहन राय की भूमि में भय की राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की Government है, लोगों को बहुत भरोसा है. लेकिन Government बदलने से रातों-रात सब कुछ नहीं बदलता. उन्होंने कहा कि 1998 में संघ ने जो पेड़ लगाया था, उसका फल 2026 में मिला है.
उन्होंने कहा कि सुवेंदु अधिकारी पहले टीएमसी में थे, अब भाजपा में हैं और प्रदेश के Chief Minister बन गए हैं. 2014 से भाजपा केंद्र में मोदी के नेतृत्व में Government चला रही है और कई राज्यों में डबल-इंजन की Government भी चल रही है.
सवाल: मुस्लिम वोट के बिना ममता बनर्जी को हराने का दम भाजपा में था, यह करके दिखाया. इसे कैसे देखते हैं
जवाब: प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, ममता बनर्जी को भाजपा ने ही हराया है. चुनाव के दौरान इस तरह की बातें भाजपा ने की थी. लेकिन, India का संविधान किसी एक धर्म, जाति या समुदाय का नहीं है. यह सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान सम्मान की बात करता है. राजनीति अगर लोगों को बांटने लगे, तो वह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ चली जाती है.
सवाल: इस चुनाव में घुसपैठिए प्रमुख मुद्दे रहे, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा कि भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे उठाए, उनमें घुसपैठ का मुद्दा भी रहा है. घुसपैठ का मुद्दा ठीक है और है भी. हालांकि, मुख्य मुद्दा रोटी, कपड़ा, शिक्षा, सड़क होना चाहिए. उन्होंने कहा कि भाजपा और टीएमसी एक दूसरे के खिलाफ रही हैं. लेकिन, हिन्दु-मुस्लिम की राजनीति के अलावा इस चुनाव में दूसरा कोई मुद्दा ही नहीं है.
सवाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी के पीए की मौत को लेकर ममता बनर्जी के सीबीआई जांच की मांग को कैसे देखते हैं
जवाब: ममता बनर्जी जब विपक्ष में थीं तब लगभग हर बड़े मामले में सीबीआई जांच की मांग करती थीं. लेकिन सत्ता में आने के बाद कई मामलों में वही एजेंसियों पर सवाल उठाने लगीं. दूसरी तरफ भाजपा भी अलग-अलग राज्यों में अपने Political महत्वाकांक्षाओं के हिसाब से संस्थाओं का इस्तेमाल करती दिखाई देती है.
बंगाल की नई भाजपा Government का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उम्मीद तो है, लेकिन अभी इंतजार करना होगा. किसी भी Government के आने के बाद रातों-पात सब कुछ बदल नहीं जाता. कम से कम शुरुआती छह महीने देखना चाहिए कि Government किस दिशा में काम कर रही है, क्या फैसले ले रही है और प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव हो रहे हैं.
सवाल: social media लोगों के गुस्से और विरोध का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है. अगर आप 2012 वाली घटना आज 2026 में करते, तो क्या आपको वही डर महसूस होता
जवाब: लोगों को बोलना चाहिए, लिखना चाहिए. आज स्मार्टफोन और social media के जरिए हर व्यक्ति अपनी बात रख सकता है. यह एक सतत लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन हर Government यह कोशिश करती है कि लोग Government के खिलाफ सवाल न उठाएं. कभी Police प्रशासन के जरिए, कभी कानूनों के जरिए, और कभी मानसिक दबाव बनाकर लोगों को डराने की कोशिश होती है. फिर भी लोग लिखेंगे, बोलेंगे, कार्टून बनाएंगे, यह लोकतंत्र का हिस्सा है.
सवाल: क्या आपको लगता है कि ममता बनर्जी की राजनीति हमेशा सत्ता-केंद्रित रही है
जवाब: ममता बनर्जी की राजनीति का मुख्य लक्ष्य हमेशा सत्ता हासिल करना और उसे बनाए रखना रहा. इसके लिए उन्होंने अलग-अलग समय पर अलग-अलग Political ताकतों के साथ गठबंधन किया. पहले कांग्रेस के साथ रहीं, फिर अलग होकर अपनी पार्टी बनाई. बाद में कई क्षेत्रीय और वैचारिक समूहों के साथ भी समझौते किए. उनकी राजनीति में विचारधारा से ज्यादा सत्ता प्राप्ति महत्वपूर्ण दिखाई दी.
सवाल: आखिर में उस मशहूर कार्टून विवाद पर लौटते हैं. क्या वह कार्टून आपने बनाया था
जवाब: मैंने वह कार्टून नहीं बनाया था. मैंने सिर्फ एक ईमेल अटैचमेंट किया था. वह उस समय की समकालीन राजनीति पर आधारित एक व्यंग्य चित्र था. उस समय तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का रेल बजट और उसके बाद अचानक बदलाव की जो Political घटना हुई थी, उसी संदर्भ में वह कार्टून था. यह पूरी तरह Political व्यंग्य का हिस्सा था.
सवाल: जिन नेताओं ने कभी तृणमूल कांग्रेस में रहकर राजनीति की, वही आज भाजपा का चेहरा बन गए हैं. इसे आप कैसे देखते हैं.
जवाब: यह एक Political वास्तविकता है. आज जो लोग भाजपा में बड़े पदों पर हैं, उनमें कई पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे. सुवेंदु अधिकारी लंबे समय तक ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में थे. मुकुल रॉय भी तृणमूल कांग्रेस के महत्वपूर्ण चेहरे थे और बाद में भाजपा में गए. उन्होंने तंज कसा कि भाजपा के वॉशिंग मशीन में सारे दाग धुल जाते हैं.
सवाल: पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक अराजकता और डर का माहौल रहा. क्या आपको लगता है कि अब लोगों ने उस डर को तोड़ दिया है
जवाब: हां, बिल्कुल. लंबे समय तक लोगों के भीतर भय का वातावरण था. चुनावों में चाहे पंचायत, नगरपालिका, विधानसभा या Lok Sabha चुनाव हों, गुंडागर्दी और आतंक का माहौल रहता था. बहुत से लोग वोट तक नहीं दे पाते थे. लेकिन इस बार लोगों ने निडर होकर अपने अधिकार का इस्तेमाल किया. जनता ने यह दिखा दिया कि लोकतंत्र सिर्फ सत्ता का नाम नहीं है, बल्कि लोगों की भागीदारी और निर्भीकता का नाम है.
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डीकेएम/पीएम