
Mumbai , 13 अगस्त . Enforcement Directorate (ईडी) ने Mumbai की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में साई ग्रुप और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक शिकायत पत्र (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है. एजेंसी ने जयेश विनोद तन्ना, दीप विनोद तन्ना, विवेक जयेश तन्ना और साई ग्रुप की सात अन्य कंपनियों को आरोपी बनाया है.
ईडी के Mumbai जोनल ऑफिस ने 31 जुलाई 2026 को यह शिकायत दायर की. यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 3 और धारा 70 के तहत दर्ज मनी-लॉन्ड्रिंग के अपराध से जुड़ा है, जिसके लिए धारा 4 में सजा का प्रावधान है. पीएमएलए स्पेशल कोर्ट ने मामले के सभी आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है.
ईडी ने 2024 में यह जांच शुरू की थी. आधार Mumbai Police द्वारा जयेश विनोद तन्ना, दीप विनोद तन्ना और अन्य के खिलाफ दर्ज कई First Information Report थीं. इन First Information Report में भारतीय दंड संहिता और Maharashtra ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट, 1963 की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं. अब तक Mumbai Police ने ऐसे 17 मामलों में से 14 में चार्जशीट दायर कर दी है.
ईडी की जांच में सामने आया कि साई ग्रुप की कंपनियों के प्रमोटरों ने Mumbai मेट्रोपॉलिटन रीजन में डीएन नगर, अंधेरी, कांदिवली और गोरेगांव में चल रहे अपने प्रस्तावित रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में फ्लैट और दुकान खरीदारों से लिया गया फंड निजी फायदे के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया. इस वजह से प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो सके. इससे खरीदारों, पुराने किरायेदारों यानी सोसायटी के मूल सदस्यों और निवेशकों को कुल 43.73 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
इससे पहले ईडी ने पीएमएलए की धारा 5 के तहत अपराध से अर्जित 43.73 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की थी. अटैच की गई संपत्तियों में आरोपियों से जुड़ी Mumbai और Maharashtra के अहमदनगर जिले में स्थित अचल संपत्तियां शामिल हैं. इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम में स्थित एक अचल संपत्ति को भी कुर्क किया गया है.
एजेंसी का कहना है कि प्रमोटरों ने खरीदारों का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया और कुछ रकम विदेश भेजी गई. इसी धन को वैध दिखाने के लिए विभिन्न कंपनियों के जरिए लेन-देन किया गया.
ईडी ने अपनी कंप्लेंट में दस्तावेजी सबूत, बैंक लेन-देन और गवाहों के बयान कोर्ट के सामने पेश किए हैं. अब कोर्ट संज्ञान लेने से पहले सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगेगी.
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एससीएच/एबीएम