
New Delhi, 4 जून . भारत-लाओ पीडीआर संयुक्त आयोग की 10वीं बैठक राष्ट्रीय राजधानी में संपन्न हुई. विदेश मंत्री एस जयशंकर और लाओ पीडीआर के उप Prime Minister तथा विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने ने बैठक की सह-अध्यक्षता की. जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में लाओस के प्रतिनिधिमंडल का India में स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह उनके समकक्ष की पहली India यात्रा है, जो दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है.
Wednesday को हुई भारत-लाओस संयुक्त आयोग की बैठक की जयशंकर और फोमविहाने ने सह-अध्यक्षता की थी. अपने शुरुआती संबोधन में जयशंकर ने लाओस में हाल ही में हुए राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन और उनके समकक्ष को बतौर उप-Prime Minister पदोन्नत होने पर बधाई दी.
उन्होंने India और लाओस के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “दोनों देशों के बीच संबंध बौद्ध धर्म और रामायण जैसी साझा सभ्यतागत विरासत से जुड़े हुए हैं. यह संबंध केवल Political नहीं बल्कि लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है.”
उन्होंने अपनी 2024 की आसियान (आसियान) अध्यक्षता के दौरान लाओस की यात्रा को याद किया और कहा कि वह यात्रा उनके लिए बहुत यादगार रही. उस समय उन्हें लाओस के Prime Minister से मिलने का अवसर भी मिला था.
जयशंकर ने यह भी बताया कि India के Prime Minister ने अक्टूबर 2024 में लाओस का दौरा किया था. उस यात्रा के दौरान कई समझौते और एमओयू (सहयोग समझौते) पर हस्ताक्षर हुए थे. उन्होंने कहा, “आज की बैठक में इन समझौतों की समीक्षा की जाएगी और आगे सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा होगी.”
India के विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देश Political सहयोग, आर्थिक संबंध, रक्षा, विकास साझेदारी, शिक्षा, संस्कृति और बहुपक्षीय सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि यह बैठक बहुत उत्पादक साबित होगी.
दरअसल, पिछले वर्ष अगस्त में Prime Minister Narendra Modi ने चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान लाओस के President थोंगलून सिसोलिथ से मुलाकात की थी और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों के महत्व पर जोर दिया था.
–
केआर/