Skip to content
Friday, 30 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
आपदा,राष्ट्रीय

मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, रीवा में 4,000 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

Madhya Pradesh के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, रीवा में 4,000 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

Bhopal , 21 अगस्त . Madhya Pradesh के पूर्वी जिलों में बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. Friday को नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां उफान पर हैं. प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है.

डिंडोरी, पन्ना, रीवा, सतना और छतरपुर जिलों में सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है. कई इलाकों में जलभराव हो गया है. सुरक्षा को देखते हुए मैहर और डिंडोरी में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. डिंडोरी में आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद किए गए हैं. जिला प्रशासन अलर्ट पर है.

रीवा जिले में हालात सबसे खराब हैं. Friday तक के आंकड़ों के मुताबिक 27 राहत शिविरों में करीब 3,000 लोगों को रखा गया है. अब तक बाढ़ में फंसे 4,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. राजस्व अधिकारी, Police और रेस्क्यू टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात हैं और लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

मऊगंज में अष्टभुजा नदी उफान पर है. नदी का पानी नैगढ़ी गांव तक पहुंच गया. अमृत योजना के तहत निर्माण कार्य कर रहे चार मजदूर फंस गए. इनमें से एक मजदूर तेज बहाव में बह गया.

डिंडोरी में खेरमेर नदी के बढ़ने से डिंडोरी-मंडला स्टेट हाईवे बंद करना पड़ा. पुल के ऊपर से पानी बह रहा है. एहतियात के तौर पर 12वीं तक के सभी स्कूल बंद किए गए हैं. पन्ना में भी इसी तरह के कदम उठाए गए हैं. चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी वहां के बाजार तक पहुंच गया है. गोदावरी गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है.

मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि Madhya Pradesh में 25 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा. पूर्वी हिस्से में भारी बारिश की संभावना ज्यादा है. इसके बाद बारिश धीरे-धीरे मध्य और पश्चिम-मध्य हिस्सों में भी बढ़ेगी.

अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, Madhya Pradesh में 599 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 675.1 मिलीमीटर है. यानी कुल 11 प्रतिशत की कमी है. पूर्वी Madhya Pradesh में 11 प्रतिशत और पश्चिमी एमपी में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी वजह पूर्वोत्तर Madhya Pradesh और आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र और मॉनसून ट्रफ है.

–

वीकेयू/पीएम

Share