पहले हम हिंदुस्तानी हैं, इसके बाद कुछ और हैं : शिया धर्म गुरु मौलाना फरीद

Lucknow, 16 जुलाई . शिया धर्म गुरु मौलाना फरीद ने लोगों से कांवड़ यात्रियों का स्वागत करने की अपील की. उन्होंने कहा कि पहले हम हिंदुस्तानी हैं. इसके बाद हमारा किसी धर्म से लेना-देना है. हमारा इस्लाम भी हमें यही सिखाता है कि वतन से मोहब्बत करना ही ईमान है.

उन्होंने Thursday को से बातचीत में कहा कि एक हिंदुस्तानी होने के नाते हमारी कोशिश होनी चाहिए कि किसी भी कांवड़ यात्रियों को कोई दिक्कत नहीं हो. हमें उनका स्वागत करना चाहिए. वो नेक काम के लिए जा रहे हैं. आमतौर पर सावन के महीने में कांवड़ यात्री आते-जाते हैं. वो मन्नत मांगते हैं. मान्यता है कि मन्नतें पूरी भी होती हैं. यह 30 दिनों की यात्रा होती है. श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासा उत्साह भी देखने को मिलता है. India देश में विभिन्न धर्मों और भाषाओं के लोग रहते हैं. हमारे देश में विविधता पाई जाती है. यही इस देश की खूबसूरती है.

शिया धर्म गुरु मौलाना फरीद ने ईसाई कैलेंडर का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, पहले हम हर प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों का निर्वहन ईसाई कैलेंडर के हिसाब से करते थे. इस्लाम का अपना कोई कैलेंडर नहीं था. इस्लाम धर्म में भी ईसाई कैलेंडर को मान्य माना जाता था. इसके बाद इस्लाम धर्म की ओर से भी कैलेंडर की शुरुआत की गई, जिसके बाद हर प्रकार के मजहबी रवायतों के लिए इस्लामी कैलेंडर का सहारा लिया गया, जिसके बाद से यह सिलसिला अब तक जारी है.

उन्होंने हैदराबाद स्कूल में ‘कलमा’ होमवर्क विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि पहले हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम स्कूल और कॉलेज की प्राथमिक शिक्षाओं को पूरा करें. उसके साथ किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करें. वहां के जो नियम हैं, उसे पूरा करें. अगर कोई व्यक्तिगत तौर पर अन्य धर्मों के रीति रिवाज के बारे में जानना चाहता है, तो वो जान सकता है, उसके बारे में सीख सकता है. हमारी यही कोशिश होनी चाहिए कि हम दूसरे धर्मों की खूबसूरत चीजों को भी समझने की कोशिश करें, उसे सीखे और अपने जीवन में लागू करें.

उन्होंने मौलाना जर्जिस के बयान को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कोई भी वक्तव्य नहीं देना चाहिए, जिससे समाज में नफरत की खाई चौड़ी हो. लेकिन, हम इतना जरूर कहेंगे कि हमारे इस्लाम में एक लाख 24 हजार पैगंबर आए थे. जिसमें से कुछ नाम कुरान में मिल जाते हैं और बाकी के नाम नहीं मिलते हैं. वहीं, कुछ नाम जो India के अलावा पूरी दुनिया में जाने जाते हैं, हम भी उन नामों का जिक्र पूरे सम्मान के साथ करते हैं.

उन्होंने कहा कि हम श्रीराम जी, श्री कृष्ण जी, इनका नाम सम्मान से लेते हैं. हमारी यही कोशिश होनी चाहिए कि हम अपनी जुबां से ऐसी कोई बात नहीं कहे, जिससे किसी को किसी भी प्रकार का ठेस पहुंचे. अगर कोई ऐसा कर रहा है, तो वो आस्था को ठेस पहुंचा रहा है.

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एसएचके/एबीएम

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