
कोलकाता, 24 जून . पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने Wednesday को कहा कि भाजपा Government को पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) Government से ‘भारी कर्ज वाली और असामान्य स्थिति’ विरासत में मिली थी. लेकिन, वह इसे ‘तेजी से बढ़ती बाजार अर्थव्यवस्था’ में बदलने की कोशिश कर रही है.
के साथ खास बातचीत में, राज्य का बजट 2026-27 पेश करने के बाद दासगुप्ता ने लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों, मुख्य फोकस वाले क्षेत्रों और भविष्य की संभावनाओं पर बात की. यहां पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश.
सवाल : हमें पश्चिम बंगाल के बजट की अपनी तैयारी के बारे में बताएं, क्योंकि यह राज्य में भाजपा Government का पहला बजट भी है.
जवाब : मुझे थोड़ी घबराहट हो रही थी, क्योंकि आप न तो बहुत ज्यादा नौकरशाही वाला बजट चाहते हैं और न ही इतना ज्यादा Political बजट जो पूरी प्रक्रिया पर हावी हो जाए. आपको एक संतुलन बनाना था. मुझे लगता है कि यह अच्छा रहा. 8 लाख करोड़ रुपए का बहुत बड़ा कर्ज विरासत में मिला है. आप इसे कैसे चुकाएंगे और इससे जुड़ी जिम्मेदारियों को कैसे पूरा करेंगे? अब इसे करने के दो तरीके हैं. पहला, जो मुझे लगता है कि इसमें बहुत महत्वपूर्ण रहा है और जिसे लोगों ने नहीं समझा, वह यह है कि पिछले 15 या कम से कम पिछले 10 वर्षों से, पश्चिम बंगाल ने केंद्र की लगभग सभी योजनाओं और परियोजनाओं को नजरअंदाज किया है. इसलिए, केंद्र की परियोजनाओं से राज्य को जो लाभ मिल सकते थे, उनके बारे में कुछ अधिकारियों को भी पता नहीं था. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई ऐसी बातें बताईं जिनके बारे में राज्य को पता नहीं था. यह एक बड़ा फायदा साबित हुआ. हमारे लिए दूसरी महत्वपूर्ण बात नियमों का बेहतर पालन है. Tuesday को, Chief Minister (सुवेंदु अधिकारी) ने बताया था कि कैसे बीरभूम जिले में रेत और खदानों के मामले में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी. वह एक ऐसा क्षेत्र था जिसे पूरी तरह से लुटेरों के भरोसे छोड़ दिया गया था. वहां पूरी तरह से लूट मची हुई थी. रॉयल्टी का भुगतान ही नहीं किया जाता था. बाहर निकलने वाले आठ ट्रकों में से शायद सिर्फ एक ही भुगतान करता था. यह बहुत बड़े पैमाने पर लूट थी. अब हम डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा. हमें शिकायतों से भरा राज्य मिला. हर किसी को शिकायतें थीं. Governmentी कर्मचारी, छात्र, माता-पिता, शिक्षकों की भर्ती को लेकर, व्यापारी ‘सिंडिकेट राज’ से परेशान थे. लोग राज्य छोड़कर जाने की योजना बना रहे थे. हमें इन शिकायतों को दूर करने की कोशिश करनी थी. हम उस स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो पूरी तरह से असामान्य हो गई थी. इस बजट को बंगाल के लोगों और बाहर के लोगों का भरोसा फिर से जीतने के लिए एक Political कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए. कई सुधार इस बात को ध्यान में रखकर किए गए कि सिंगुर के बाद, उद्योगपतियों का राज्य से भरोसा उठ गया था. आम राय यह थी कि बंगाल में बिजनेस करना बहुत मुश्किल है. हमें उस सोच से बाहर निकलना था. मैंने कहा था कि हमारी Government बिजनेस-फ्रेंडली होगी. हम जल्द से जल्द एक नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लागू करने की योजना बना रहे हैं. हम समय के साथ दौड़ रहे हैं. हमने 50 साल गंवा दिए और हम उसकी भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं.
सवाल : राज्य में व्यवसायों और उद्योगों को वापस लाने के लिए Government की क्या योजना है?
जवाब : कोई भी राज्य को बेकार नहीं समझना चाहता. जब हम चुनाव जीते तो लोगों ने राहत महसूस की. अब हालात खराब नहीं होंगे. हम इन्वेस्टर्स से कह रहे हैं कि यहां आएं, यह भरोसेमंद होगा. मुझे भरोसा है कि बंगाल देश में कोई नई जगह नहीं है. कई लोगों ने बंगाल में ही इंडस्ट्रीज शुरू की थी. वे हालात का जायजा लेंगे, और अगर हम उम्मीदों पर खरे उतरे, तो इसे रफ्तार मिलेगी.
सवाल : राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को लेकर Government की क्या योजनाएं हैं?
जवाब : पोर्ट्स (बंदरगाहों) का मामला लंबे समय का है. इसके लिए इन्वेस्टमेंट की जरूरत होगी. लुधियाना से डंकुनी तक एक फ्रेट कॉरिडोर है जो बिहार में खत्म होता है. पिछली Government ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. हम इसे पूरा करने के लिए पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं. हमने प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए अर्बन लैंड (सीलिंग एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1976 की समीक्षा करने का फैसला पहले ही घोषित कर दिया है. मुझे लगता है कि यह पुराना कानून पुराने समाजवादी दौर की निशानी है और इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए. ऐसी जमीन भी है जो इंडस्ट्रीज के लिए दिए जाने के बावजूद इस्तेमाल नहीं हो रही है. हम इन जमीनों पर शॉपिंग मॉल क्यों बनाते हैं? बेहतर होगा कि इनका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए किया जाए. हम चाहते हैं कि लोग इस बात को लेकर उत्साहित हों कि बंगाल में क्या-क्या हो सकता है. हम हमेशा से ‘गेटवे ऑफ द ईस्ट’ रहे हैं, लेकिन बीच में पिछड़ गए, 1966 के बाद, जब लेफ्ट सत्ता में आया और उग्र ट्रेड यूनियन गतिविधियां शुरू हुईं. कुछ लोग कहते हैं कि ऐसा तृणमूल कांग्रेस की हरकतों की वजह से हुआ. इस (तृणमूल) ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी. कंपनियां संपर्क कर रही हैं. कई लोगों ने निजी तौर पर मुझसे और Chief Minister से अलग-अलग बात की है. हम अपनी सभी तैयारियों को एक साथ लाएंगे और फिर शुरुआत करेंगे. ऐसा कोई समिट नहीं होगा. लोगों को बुलाने से पहले हमें अपनी तैयारी पूरी करनी होगी. मैं यह नहीं कह रहा कि ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ को रद्द कर दिया जाए, लेकिन यह प्राथमिकता नहीं है. यह एक मजाक बनकर रह गया था. लोग हालात का जायजा ले रहे हैं. वे निवेश करना चाहते हैं.
सवाल : शराब से होने वाली कमाई को कैसे संभालेंगे?
जवाब : शराब की स्थिति बेकाबू हो गई थी. यह सामाजिक समस्या बन गई थी. महिलाएं शिकायत कर रही थीं कि रिहायशी इलाकों में शराब की दुकानें हैं और लोग खुलेआम शराब पी रहे हैं. अभी शराब पर बहुत ज्यादा निर्भरता है. हम इसे बदलना चाहते हैं. हमारा लक्ष्य देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बनना है, जिसकी ग्रोथ रेट सबसे ज्यादा हो. हम विकास की गति बढ़ाना चाहते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देना चाहते हैं.
सवाल : राज्य में मिड-डे मील स्कीम को इस्कॉन से लागू करवाने के भाजपा Government के फैसले पर विवाद हो रहा है, जिसमें अंडे शामिल नहीं होंगे?
जवाब : यह मामला संवेदनशील हो सकता है, लेकिन हम इसे अच्छे से चलाना चाहते हैं. इस्कॉन बंगाली स्वाद के हिसाब से अपने मेन्यू में बदलाव कर सकता है. यह काम करेगा, लेकिन उनसे अंडे परोसने के लिए कहना ठीक नहीं होगा. अगर कोई समस्या आती है, तो हम उसे हल करेंगे. पहले से चल रही ‘मां किचन’ में अंडे और मछली परोसे जा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि हम शाकाहार या ऐसी किसी चीज को बढ़ावा दे रहे हैं.
सवाल : बंगाल Government राज्य की अर्थव्यवस्था को विकसित करने की क्या योजना बना रही है?
जवाब : हम इसे तेजी से बढ़ने वाली मार्केट इकॉनमी बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अभी इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. हम दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को दिन-रात चलाने की इजाजत देंगे. इससे रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ेगा और रोजगार भी पैदा होगा. इसके बाद कोलकाता एक बिल्कुल अलग शहर बन जाएगा. हम जोखिम उठा रहे हैं और साहसी कदम उठा रहे हैं. हर कोई हमारी तरफ देख रहा है. हम फेल नहीं हो सकते.
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एससीएच/एबीएम