
गुरुग्राम, 19 फरवरी . एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत सेक्टर-83 स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट ‘अंसल हब-83’ से जुड़े बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट फ्रॉड के मामले में लगभग 82 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच कर लिया है.
यह प्रोजेक्ट करीब 19 कनाल 15 मरला (लगभग 2.47 एकड़) जमीन पर फैला है, जिसमें 147 कमर्शियल दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और 2 रेस्टोरेंट यूनिट शामिल हैं. ईडी की जांच Haryana Police द्वारा जून 2023 में दर्ज First Information Report पर आधारित है, जिसमें आईपीसी की धाराओं 120-बी, 406 और 420 के तहत मेसर्स अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पहले अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटर्स और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी.
इसमें फुल टाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल तथा जुड़ी कंपनियां मेसर्स सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं. यह मामला ‘अंसल हब-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन’ की शिकायत पर शुरू हुआ, जो एक हजार से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है. निवेशकों ने झूठे वादों और गुमराह करने वाली बातों पर अपनी मेहनत की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई थी.
जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया और वैध कानूनी मंजूरी मिलने से पहले ही कमर्शियल यूनिट्स निवेशकों को बेच दी गईं. प्रोजेक्ट का लाइसेंस दिसंबर 2015 में समाप्त हो गया था, लेकिन डेवलपर्स ने इसे रिन्यू कराए बिना सितंबर 2023 तक पैसे इकट्ठा करना और यूनिट्स बेचना जारी रखा.
कई निवेशकों ने Haryana रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (एचआरईआरए) से भी शिकायत की थी, जिसमें पजेशन में देरी, प्रोजेक्ट पूरा न होना, गैर-कानूनी फंड जुटाना और डेवलपर द्वारा जिम्मेदारियों के उल्लंघन के आरोप थे. निवेशकों को समय पर पजेशन और विश्व-स्तरीय सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 साल बीत जाने के बाद भी कोई ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ और न ही पजेशन दिया गया.
ईडी ने पाया कि 2011 से 2023 तक निर्दोष अलॉटीज से 82 करोड़ रुपए से अधिक रकम इकट्ठा की गई, लेकिन फंड का इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय अन्य कार्यों और निजी फायदे के लिए किया गया. प्रोजेक्ट की जमीन और अब तक हुए निर्माण को प्रोविजनली अटैच कर दिया गया है, ताकि संपत्तियों का कोई ट्रांसफर, बिक्री या डिस्पोजल न हो सके और पीएमएलए के तहत भविष्य में जब्ती की कार्रवाई प्रभावित न हो.
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एससीएच