
Lucknow, 9 जुलाई . Enforcement Directorate (ईडी) ने पूर्व विधायक दीप नारायण यादव से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. ईडी के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने Wednesday को झांसी, Lucknow और उत्तर प्रदेश की अन्य जगहों पर 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002’ के तहत झांसी के गरौठा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई.
ईडी ने इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश Government के विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर की थी. दर्ज First Information Report में आरोप लगाया गया था कि दीप नारायण यादव ने जांच की अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक, लगभग 23.02 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति जमा की थी.
जांच में यह भी पता चला है कि दीप नारायण यादव के खिलाफ झांसी और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के विभिन्न Police स्टेशनों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. इन मामलों में आईपीसी, 1860 के तहत डकैती, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, गैर-इरादतन हत्या की कोशिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं. इनमें से कई अपराध पीएमएलए, 2002 के तहत ‘अनुसूचित अपराध’ की श्रेणी में आते हैं.
First Information Report और चार्जशीट से पता चला है कि दीप नारायण यादव ने आपराधिक गतिविधियों और अपने Political प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके अपराध से भारी कमाई की थी. जांच में यह भी सामने आया है कि उन्होंने अपराध से हुई कमाई को छिपाने और उसे वैध संपत्ति के तौर पर दिखाने के लिए कंपनियों का एक नेटवर्क बनाया था, जिसमें फर्जी कंपनियां भी शामिल थीं.
उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नियंत्रण वाली विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं और निवेशों के माध्यम से इस अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में पेश किया. यह भी पता चला है कि अपराध से हुई कमाई का इस्तेमाल करके सहयोगियों और दूर के परिवार के सदस्यों के नाम पर कई चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं और उन्हें वैध संपत्ति के तौर पर दिखाया गया.
तलाशी अभियान के दौरान ईडी को कई ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले जिनसे गड़बड़ी का पता चलता है. इनमें कंपनियों के बीच लेन-देन, तीसरे पक्ष के साथ समझौते, संदिग्ध लेन-देन दिखाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और अलग-अलग बिजनेस कंपनियों, परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर मौजूद महंगी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं.
जांच में ईडी को कुछ ऐसी कंपनियां भी मिलीं, जो सिर्फ कागजों पर थीं और असल में कोई बिजनेस नहीं कर रही थीं. संदिग्ध बेनामी अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और अपराध से हुई कमाई को कई परतों में घुमाकर छिपाने से जुड़े रिकॉर्ड भी बरामद और जब्त किए गए.
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डीके/डीकेपी