
तिरुवनंतपुरम, 25 मई . करीब छह दशक लंबे सार्वजनिक जीवन में शायद पहली बार पी. विजयन खुद को Political दबाव में महसूस कर रहे हैं. खास बात यह है कि यह दबाव सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर से भी बढ़ रहा है, जिस पर कभी उनका पूरा नियंत्रण माना जाता था.
केरल में सीपीआई(एम) को मिली बड़ी चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर विजयन के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई है. यह विरोध अब जमीनी स्तर की बैठकों से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच गया है.
करीब 25 साल तक केरल में सीपीआई(एम) के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले पिनाराई विजयन अब अपनी ही पार्टी में कड़ी आलोचना का सामना कर रहे हैं. पिछले 10 सालों में Government पर उनकी इतनी मजबूत पकड़ थी कि उनकी मंजूरी के बिना शायद ही कोई बड़ा फैसला होता था, लेकिन अब पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ खुलकर सवाल उठने लगे हैं.
केरल के पार्टी नेतृत्व को सबसे ज्यादा झटका इस बात से लगा कि सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति ने राज्य इकाई के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केरल में Government के खिलाफ नाराजगी जैसी कोई स्थिति नहीं थी.
पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर Government के खिलाफ लोगों में नाराजगी नहीं थी, तो फिर पार्टी को इतनी बड़ी हार कैसे मिली?
यह आलोचना सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही. केरल में एरिया कमेटी की बैठकों के दौरान पार्टी सदस्यों ने खुलकर कहा कि विजयन का काम करने का तरीका और उनके सार्वजनिक बयान आम लोगों को सीपीआई(एम) से दूर कर रहे हैं.
चालाकुडी क्षेत्र समिति की बैठक में सदस्यों ने कहा कि पूर्व Chief Minister के बयान और उनका रवैया लोगों को पार्टी से दूर ले गया. उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय नेताओं के काम करने के तरीके को लेकर भी कड़ी आलोचना हुई.
एम.वी. गोविंदन पर भी आलोचना हो रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि संवेदनशील Political मुद्दों पर उनके जवाबों को समझना पार्टी के सदस्यों के लिए भी मुश्किल होता है.
फिर भी पार्टी के अंदर यह धारणा बढ़ रही है कि इस स्थिति में एम.वी. गोविंदन की भी भूमिका है, लेकिन जनता के गुस्से और नाराजगी का मुख्य निशाना अब भी पिनाराई विजयन ही बने हुए हैं.
विडंबना यह है कि वही नेता, जिसे कभी सीपीआई(एम) के भीतर अजेय माना जाता था, अब पार्टी के भीतर जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक सुधारों की मांगों का सामना कर रहा है.
भले ही पार्टी नेतृत्व नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन अब यह सच नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि पी. विजयन के इर्द-गिर्द बनी Political विजेता की छवि में अब तक की सबसे बड़ी दरार आ गई है.
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एसएचके/एएस