निर्देशक नितिन बोस ने शुरू की थी भारतीय फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग

New Delhi, 25 अप्रैल . 26 अप्रैल 1897 को जन्मे नितिन बोस भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा नाम है, जिन्होंने न केवल निर्देशन बल्कि सिनेमैटोग्राफी (छायांकन) और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से फिल्म उद्योग को नई दिशा दी.

उनका करियर कई दशकों तक फैला रहा और हर चरण में उन्होंने कुछ नया जोड़ा. नितिन बोस ने ही पहली बार भारतीय फिल्म में प्लेबैक सिंगिंग का प्रचलन शुरू किया था. 1960 में आई फिल्म गंगा-जमुना का निर्देशन नितिन बोस ने किया था, जिसे लोग आज भी पसंद करते हैं.

नितिन बोस बंगाली उद्यमी हेमेंद्र मोहन बोस और मृणालिनी बोस के पुत्र थे. मृणालिनी लेखक उपेंद्र किशोर रायचौधरी की बहन थीं, जो कवि सुकुमार राय के पिता और फिल्म निर्देशक सत्यजीत राय के दादा थे. बोस की चचेरी बहन प्रसिद्ध बाल लेखिका लीला मजूमदार थीं. नितिन को बचपन से ही फोटोग्राफी में बहुत रुचि थी. शौकीन फोटोग्राफर पिता ने अपने बेटे की इस रुचि को बढ़ावा दिया.

नितिन बोस ने अपने करियर की शुरुआत 1926 में एक सिनेमैटोग्राफर के रूप में की थी. उस समय भारतीय सिनेमा मूक फिल्मों से टॉकी फिल्मों की ओर बढ़ रहा था. उन्होंने कैमरे के उपयोग, लाइटिंग और फ्रेमिंग में नए प्रयोग किए, जिससे फिल्मों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आया. न्यू थिएटर्स बैनर के तहत छायाकार के रूप में उनकी पहली फिल्म देवदास (1928) थी. वे रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा निर्देशित एकमात्र फिल्म नटिर पूजा (1932) के छायाकार थे.

बोस ने निर्देशक देबाकी बोस के साथ मिलकर काम किया , लेकिन फिर देबाकी बोस ने सीता (1934) बनाने के लिए अस्थायी रूप से न्यू थिएटर्स छोड़कर मदन थिएटर्स में काम करना शुरू कर दिया. इसी समय, न्यू थिएटर्स के निर्माता बी.एन. Government ने नितिन बोस से फिल्म निर्देशन में हाथ आजमाने का अनुरोध किया. बोस ने देबाकी बोस की फिल्म चंदीदास (1932) का बंगाली रीमेक बनाकर हिंदी में चंदीदास (1934) का निर्माण शुरू किया.

बोस 1935 की फिल्म भाग्य चक्र पार्श्व गायन (प्लेबैक सिंगिंग) का उपयोग करने वाली पहली भारतीय फिल्म थी. इस फिल्म को हिंदी में धूप छांव शीर्षक से रीमेक किया गया था , जो पार्श्व गायन (प्लेबैक सिंगिंग) का उपयोग करने वाली पहली हिंदी फिल्म थी. इससे पहले कलाकारों को शूटिंग के दौरान ही गाना पड़ता था, लेकिन इस तकनीक के बाद गाने पहले रिकॉर्ड किए जाने लगे और बाद में फिल्माए गए. यह नवाचार इतना प्रभावशाली साबित हुआ कि आज भी भारतीय फिल्मों में यही प्रणाली अपनाई जाती है.

काशीनाथ (1943) के निर्माण के दौरान बोस का बी.एन. सिरकार के साथ मतभेद हो गया था. फिल्म पूरी होने के बाद वह न्यू थिएटर्स में वापस नहीं गए. इसके बाद बोस बॉम्बे चले गए और बॉम्बे टॉकीज़ बैनर के तहत बोस ने पहली फिल्म नौकाडुबी (1947) को निर्देशित किया, जो टैगोर के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी. इस फिल्म के हिंदी संस्करण का नाम मिलन था, जिसमें दिलीप कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी. उनकी अगली फिल्म दृष्टिदान (1948) से उत्तम कुमार ने सिनेमा की शुरुआत की, जो बाद में बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार बने. 1960 के दशक में बोस ने फिल्मिस्तान के बैनर तले कई फिल्मों का निर्देशन किया. बोस द्वारा निर्देशित गंगा जमुना (1961) को आज भी भारतीय सिनेमा की सर्वकालिक ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक माना जाता है.

नितिन बोस ने अपने करियर में कई उल्लेखनीय फिल्मों का निर्देशन और छायांकन किया. उनकी फिल्मों में तकनीकी उत्कृष्टता और भावनात्मक गहराई का संतुलन देखने को मिलता है. वे ऐसे फिल्मकार थे जिन्होंने कहानी कहने के साथ-साथ फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को भी आधुनिक बनाया. नितिन बोस को 1977 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा, गंगा जमुना के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला था. बोस का निधन 14 अप्रैल 1986 को कोलकाता में हो गया था.

ओपी/एएस

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