
Mumbai , 13 जून . अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए टीवी एक्ट्रेस रश्मि देसाई ने कहा कि ‘छोटी रश्मि’ को कभी नहीं पता था कि किस्मत उन्हें कहां ले जाएगी लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी चमक बनाए रखी.
रश्मि ने वर्ष 2006 में ‘रावण’ से हिंदी टेलीविजन में डेब्यू किया था. उन्होंने अपने बचपन की कुछ पुरानी तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें वह स्टाइलिश अंदाज में तैयार नजर आ रही हैं.
इस सफर में मिले हर सबक, संघर्ष और आशीर्वाद के लिए आभार जताते हुए 2000 के दशक के शो “उतरन” में तपस्या का किरदार निभाकर मशहूर हुईं इस एक्ट्रेस ने उन अनुभवों का जश्न मनाया जिन्होंने उन्हें आज का इंसान बनाया है.
रश्मि देसाई ने इंस्टाग्राम कैप्शन में लिखा, “छोटी रश्मि को नहीं पता था कि जिंदगी उसे कहां ले जाएगी, लेकिन फिर भी वह अपने अंदर की चमक बनाए हुए थी. इस सफर में मिले हर सबक, हर संघर्ष और हर आशीर्वाद के लिए आभारी हूं.”
बता दें कि रश्मि देसाई रियलिटी शो “बिग बॉस 13” में अपने काम से लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब रही थीं.
उन्होंने ‘परी हूं मैं’, ‘झलक दिखला जा 5’, ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 6’, ‘जरा नचके दिखा 2’ और ‘नच बलिए 7’ जैसे शो में भी नजर आईं और सलमान खान की फिल्म ‘दबंग 2’ में एक खास रोल भी किया.
40 वर्षीय रश्मि आखिरी बार “वागले की दुनिया, नई पीढ़ी नए किस्से” में दिखी थीं. यह शो कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण के किरदारों, खासकर ‘द कॉमन मैन’ पर आधारित है और इसमें एक आम मिडिल-क्लास भारतीय आदमी की रोजमर्रा की समस्याओं को दिखाया गया है.
इससे पहले मई में, ‘मिसेज मारा ऑनलाइन चे’ के साथ थिएटर की दुनिया में नाम कमाने वाली रश्मि ने से बात करते हुए कहा था कि थिएटर कलाकारों को समय पर उनका हक नहीं मिलता और उन्हें “किसी और की मंजूरी” की जरूरत नहीं होती. उन्होंने कहा था कि थिएटर सबसे कम आंका जाने वाला माध्यम है.
से बातचीत में रश्मि ने बताया था कि एक थिएटर एक्टर बहुत मेहनत करता है. उन्हें समय पर उनका हक नहीं मिलता, उन्हें जो मजा आता है, उसका एक छोटा सा परिवार होता है, और वे उसी में खुश रहते हैं. उन्हें किसी और की मंजूरी की जरूरत नहीं होती. उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत नहीं होती जो उन्हें बताए कि ‘ठीक है, यह करो, वह करो.’
उन्होंने आगे कहा, “और अगर वे कोई गलती करते हैं या किसी तरह की नाकामी का सामना करते हैं, तो दूसरे लोग उनका हाथ थामने और यह कहने के लिए तैयार रहते हैं कि ‘ठीक है, यह भी गुजर जाएगा.’ तो हां, हमेशा एक नई शुरुआत होती है, और थिएटर इसे सीखने का सबसे अच्छा जरिया है. लेकिन वे ज्यादा सम्मान के हकदार हैं, और लोगों को थिएटर और थिएटर कलाकारों के बारे में और जानना चाहिए.”
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एसडी/पीएम