100 मिलियन डॉलर की मदद के बावजूद पाकिस्तान में पोलियो पर नियंत्रण नहीं, कई प्रांतों में फैला वायरस

एथेंस, 24 अप्रैल . Pakistan तेजी से पोलियो वायरस का केंद्र बनता जा रहा है और सीमापार संक्रमण के व्यापक प्रसार का केंद्र बनने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय समुदाय में की चिंता बढ़ गई है. कई प्रणालीगत समस्याओं, जिनमें भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताएं, Governmentी निष्क्रियता, कमजोर और वंचित समुदायों तक पहुंच में बाधा और टीकों को लेकर व्यापक हिचकिचाहट की वजह से वायरस ने फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया है.

एथेंस स्थित जियोपॉलिटिको के अनुसार, यह स्थिति इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि 2023 से अब तक Pakistan को पोलियो खत्म करने के लिए 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा की अंतरराष्ट्रीय मदद मिल चुकी है.

इस समय दुनिया में सिर्फ दो देश Pakistan और अफगानिस्तान ऐसे हैं जहां वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (डब्‍ल्‍यूपीवी-1) अभी मौजूद है. अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान, मामलों में काफी कमी आई है, वहीं Pakistan में पिछले दो वर्षों में डब्‍ल्‍यूपीवी-1 के 100 से ज्यादा सक्रिय मामले सामने आए हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि अब यह वायरस Pakistan के सभी बड़े प्रांतों में फैल चुका है. चाहे वह अपेक्षाकृत पंजाब हो या कम विकसित खैबर पख्तूनख्वा. डब्‍ल्‍यूएचओ की पोलियो आईएचआर इमरजेंसी कमेटी के मुताबिक, 2025 तक भी इसका फैलाव जारी है, जिसमें लाहौर और देश के केंद्रीय इलाकों के कई जिले शामिल हैं.

कमेटी ने यह भी बताया कि 2023 के बीच से ही मामलों में बढ़ोतरी दिखने लगी थी, खासकर खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान में. चिंता की बात यह भी है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में आठ साल बाद फिर से डब्‍ल्‍यूपीवी-1 का मामला सामने आया है, जो यह दिखाता है कि यह समस्या अभी गहराई से जमी हुई है.

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि विशेषज्ञ Pakistan की स्वास्थ्य प्रणाली की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को इस बीमारी को समाप्त करने में विफलता का कारण मानते हैं.

मुख्य चुनौतियों में उन्होंने दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा टीमों के लिए परिवहन की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण, टीकों की कमी, खराब समन्वय और जवाबदेही, Political हस्तक्षेप, तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का असमान वितरण शामिल है, जो मुख्य रूप से केवल अभिजात वर्ग तक ही सीमित है.

Pakistan के विकास सलाहकार नवाब अली खट्टक ने भी इन चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि पोलियो के फिर से फैलने का कारण लॉजिस्टिक बाधाएं, सुरक्षा खतरे, गलत सूचनाएं और भ्रष्टाचार हैं.

Pakistan स्थित एक अन्य शिक्षाविद असदुल्लाह चन्ना ने कहा कि इस संकट का बड़ा हिस्सा Government की उस विफलता से जुड़ा है जिसमें वह चरमपंथी विचारधाराओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाई. उनका तर्क है कि अधिकारियों ने कट्टरपंथी तत्वों का सीधा विरोध करने से परहेज किया, जिससे वर्षों तक फैली गलत जानकारी ने सार्वजनिक धारणा को प्रभावित किया और टीकों के प्रति इनकार को बढ़ावा दिया.

चन्ना के अनुसार, पोलियो का लगातार बने रहना Political उपेक्षा का भी परिणाम है, क्योंकि लगातार Governmentें चरमपंथी प्रचार का मुकाबला करने में असफल रही हैं, जबकि मौजूदा नेतृत्व तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की बजाय Political और न्यायिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त है.

एवाई/वीसी

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