
New Delhi, 21 जून . बिहार के भोजपुर जिले में India भूषण तिवारी की कथित Police मुठभेड़ में मौत के मामले में Supreme Court से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई है. इस संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष एक प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) दायर कर First Information Report दर्ज करने, स्वतंत्र जांच कराने और Police मुठभेड़ों से जुड़े Supreme Court के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की अपील की गई है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को संबोधित यह प्रतिनिधित्व अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने दायर किया है. इसमें 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई मुठभेड़ की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है. जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का सुझाव दिया गया है.
प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि इस घटना ने कानून के शासन, संवैधानिक अधिकारों और Police मुठभेड़ों को लेकर Supreme Court द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
याचिका में दावा किया गया है कि मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि India भूषण तिवारी ने Police के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था. social media पर वायरल कुछ वीडियो भी कथित रूप से आत्मसमर्पण की स्थिति की ओर संकेत करते हैं. परिवार का कहना है कि गोली चलाए जाने के समय तिवारी निहत्थे थे और यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि न्यायेतर हत्या (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) थी.
प्रतिनिधित्व में यह भी कहा गया है कि मृतक के खिलाफ किसी आपराधिक इतिहास या पूर्व First Information Report की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. उन्हें एक स्नातक और social media के माध्यम से बाढ़, कटाव तथा जनसमस्याओं को उठाने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था.
याचिका के अनुसार, यदि तिवारी ने वास्तव में आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उनके खिलाफ घातक बल का प्रयोग कानून सम्मत Police कार्रवाई की सीमा से बाहर माना जा सकता है और यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है.
प्रतिनिधित्व में Supreme Court के वर्ष 2014 के पीयूसीएल बनाम Maharashtra राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी Police मुठभेड़ में मौत होने पर First Information Report दर्ज करना, स्वतंत्र जांच कराना, मजिस्ट्रेट जांच, सबूतों का संरक्षण और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) या राज्य मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट देना अनिवार्य है.
याचिका में कहा गया है कि Police मुठभेड़ केवल असाधारण परिस्थितियों में और जीवन पर तत्काल खतरे की स्थिति में ही की जा सकती है. इसे गिरफ्तारी, जांच, मुकदमे और न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनाया जा सकता.
प्रतिनिधित्व में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुठभेड़ में शामिल Policeकर्मियों के निलंबन की खबरें सामने आई हैं, जिससे घटना की वैधता पर और सवाल उठते हैं. साथ ही, न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे गवाहों और प्रभावित लोगों में भय का माहौल बन सकता है.
याचिका में Supreme Court से मांग की गई है कि मामले में बीएनएस की धारा 103 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत First Information Report दर्ज कराने, स्थानीय Police से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और घटना से जुड़े सभी वीडियो, cctv फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और फोरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं.
साथ ही एनएचआरसी और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग को स्वतंत्र जांच के निर्देश देने तथा मृतक के परिजनों और गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई है.
गौरतलब है कि भोजपुर एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद और Political दबाव के बीच बिहार Government ने Saturday को न्यायिक जांच के आदेश दिए थे. Chief Minister सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस मामले की स्वतंत्र जांच करेंगे और सभी तथ्यों तथा विवादित पहलुओं की पड़ताल करेंगे.
इस मामले पर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि वायरल वीडियो ने मुठभेड़ की परिस्थितियों पर गंभीर संदेह पैदा किया है और केवल चार Policeकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है. दोषियों के खिलाफ समयबद्ध जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए.
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व Union Minister अश्विनी चौबे ने भी सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि India तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और वह निहत्थे थे, तो Police ने गोली क्यों चलाई. आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने भी उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुठभेड़ को संदिग्ध बताया है.
हालांकि प्रशासन का कहना है कि India तिवारी को पकड़ने गई Police टीम पर उन्होंने फायरिंग की थी, जिसके जवाब में Police ने गोली चलाई. वहीं, परिजन और ग्रामीण इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगा रहे हैं कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें गोली मारी गई.
social media पर वायरल हुए वीडियो के बाद यह मामला और अधिक विवादों में घिर गया है तथा Police कार्रवाई में मानक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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डीएससी