दिल्ली: ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ ऑनलाइन ठगी का भंडाफोड़, राजस्थान से 20 वर्षीय छात्र गिरफ्तार

New Delhi, 4 मई . दिल्ली Police की साइबर सेल (सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट) ने ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में Rajasthan के करौली जिले से 20 वर्षीय वेटनरी साइंस के छात्र अनुज मीणा को गिरफ्तार किया गया है.

Police के अनुसार, यह गिरोह इंस्टाग्राम पर ‘हैंडराइटिंग वर्क’ के नाम से फर्जी विज्ञापन डालकर नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाता था और उनसे अलग-अलग बहानों से पैसे वसूलता था.

29 अप्रैल 2026 को सीता राम बाजार, दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई. उसने बताया कि उसे इंस्टाग्राम आईडी के जरिए घर बैठे काम करने का ऑफर मिला. गिरोह ने उसे रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 500 रुपए, मटेरियल चार्ज के नाम पर 1987 रुपए, GST के नाम पर 1755 रुपए और अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर 3788 रुपए जमा कराने को कहा.

ठगों ने बार-बार कई बहाने बनाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया. इस तरह उससे कुल 34,509.95 रुपए की ठगी की गई.

शिकायत के आधार पर First Information Report दर्ज की गई और फिर Police को यूपीआई आईडी मिल गई.

तकनीकी जांच में सामने आया कि इंस्टाग्राम आईडी से जुड़े नंबर इसी खाते के मालिक से संपर्क में थे. इसके बाद Police टीम ने Rajasthan के करौली में छापा मारकर 1 मई 2026 को आरोपी अनुज मीणा को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह Rajasthan के नोहर स्थित लाइवस्टॉक रिसर्च स्टेशन में वेटरनरी साइंस का छात्र है.

उसने अपने साथी गणेश शर्मा उर्फ प्रिंस उर्फ गोलू के साथ मिलकर यह ठगी शुरू की थी. दोनों ने मिलकर इंस्टाग्राम पेज बनाया और विज्ञापन चलाकर लोगों तक पहुंच बढ़ाई.

गणेश ऑनलाइन प्रोफाइल संभालता और लोगों को ठगता था, वहीं अनुज अपने नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराता था और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था. Police ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और डिजिटल लेन-देन से जुड़े सबूत बरामद किए हैं.

जांच में यह भी सामने आया कि सूरत (Gujarat) से जुड़ी एक और शिकायत आरोपी के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से संबंधित है. Police अब फरार आरोपी गणेश शर्मा की तलाश कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है. साथ ही ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई, इसकी भी जांच जारी है. इस पूरे मामले की जानकारी केंद्रीय जिला दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने दी.

एएमटी/वीसी

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