
New Delhi, 16 अगस्त . दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने पालम गांव Police स्टेशन में दर्ज नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत दो अलग-अलग मामलों में चार आरोपियों को दोषी ठहराया है. दिल्ली Police ने आरोपियों से 1.4 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद किया था.
साउथ-वेस्ट जिला Police की ओर से Sunday को जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, चारों को जेएफएमसी फर्स्ट क्लास सौरभ गोयल की अदालत ने दोषी ठहराया.
एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत दर्ज First Information Report में 10 अगस्त को कोर्ट ने अनुज कुमार और विशाल उर्फ साम्पी को दोषी ठहराया. Police के अनुसार, अपराध होने के 133 दिनों के भीतर और मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के 45 दिनों के अंदर ही दोषसिद्धि सुनिश्चित कर ली गई.
दूसरे मामले में संजय शर्मा और रफीक अहमद को 3 अगस्त के आदेश से दोषी ठहराया गया. Police के अनुसार, अपराध के छह महीने के अंदर और 119 दिनों की सुनवाई के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया.
प्रेस रिलीज में कहा गया कि जांच टीमों और प्रॉसिक्यूशन ब्रांच की मिली-जुली कोशिशों से कोर्ट के सामने मामले असरदार ढंग से पेश किए गए. इसमें यह भी बताया गया कि असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विकास खर्ब और सुधांशु सैनी ने कोर्ट के सामने प्रॉसिक्यूशन के मामले, सबूत और तथ्य पेश किए, जिसके परिणामस्वरूप चारों आरोपियों को दोषी ठहराया गया.
पहले मामले में Police ने बताया कि 4 फरवरी को संजय शर्मा को 442 ग्राम गांजा ले जाते हुए पकड़ा गया था. उससे मिली जानकारी के आधार पर रफीक अहमद को गिरफ्तार किया गया और उसके पास से भी 400 ग्राम गांजा बरामद हुआ. पदार्थ की पुष्टि करने वाली फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल ) की पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने के बाद 6 अप्रैल को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई.
दूसरे मामले में 29 मार्च को अनुज कुमार को 545 ग्राम गांजे के साथ पकड़ा गया था. उससे मिली जानकारी के बाद Police ने विशाल उर्फ साम्पी को गिरफ्तार किया और उसके पास से 68 ग्राम गांजा और बरामद किया. बरामद पदार्थ की पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट से होने के बाद 26 जून को चार्जशीट दाखिल की गई.
साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ Police अमित गोयल ने कहा कि इन मामलों में मिली सजा दिल्ली Police और प्रॉसिक्यूशन ब्रांच की “ईमानदारी, प्रोफेशनलिज्म, आपसी तालमेल और पक्के इरादे” को दिखाती है. Police ने कहा कि इस नतीजे से वैज्ञानिक जांच की भूमिका भी सामने आती है और ड्रग्स से जुड़े अपराधों को रोकने और जल्द न्याय दिलाने के उनके संकल्प को और मजबूती मिलती है.
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ओपी/वीसी