
New Delhi, 21 अप्रैल . भारतीय सेना की माइनफील्ड (बारूदी सुरंग क्षेत्र) भेदने की क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने Tuesday को India अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) और इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 975 करोड़ रुपए के समझौते पर हस्ताक्षर किए.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए टीआरएडब्ल्यूएल असेंबली एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. इससे भारतीय सेना की बारूदी सुरंगों को भेदने की क्षमता में बड़ा सुधार होगा.
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस उपकरण की मदद से बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों में सुरक्षित रास्ते बनाए जा सकेंगे, खासकर उन सुरंगों में जिनमें एंटी-टैंक माइन और मैग्नेटिक फ्यूज लगे होते हैं. इससे भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत होगी.
यह समझौता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में किया गया.
यह खरीद India के रक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे स्वदेशी उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करेगा.
बयान में कहा गया है कि इस परियोजना से एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और इससे सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.
इस बीच, पिछले महीने रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए दो आधुनिक माउंटेन रडार खरीदने के लिए India इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ एक बड़ा समझौता किया था.
करीब 1,950 करोड़ रुपए का यह सौदा देश में रक्षा निर्माण को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस समझौते पर New Delhi में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए थे.
31 मार्च को जारी मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा मंत्रालय ने India इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ दो माउंटेन रडार, उनसे जुड़े उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की खरीद के लिए लगभग 1,950 करोड़ रुपए का समझौता किया है. इससे भारतीय वायु सेना की क्षमताओं में और इजाफा होगा.
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डीबीपी