तीन आदिवासी बालिकाओं की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण, कठोर कार्रवाई हो: दिग्विजय सिंह

Bhopal , 3 जून . राज्यसभा सांसद एवं Madhya Pradesh के पूर्व Chief Minister दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आदिवासी बहुल ग्राम सगौर में कुएं में डूबने से तीन नाबालिग आदिवासी बालिकाओं की हुई दर्दनाक मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही एवं पेयजल व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण बताते हुए Chief Minister मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

दिग्विजय सिंह को नगर पालिका रायसेन में नेता प्रतिपक्ष प्रभात चावला के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्राम सगौर में वर्ष 2022 से नल जल योजना कागजों में संचालित दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविकता में ग्रामीणों को आज भी पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है.

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, ग्राम सगौर निवासी राधा गौंड (14 वर्ष), तनु गौंड (11 वर्ष) एवं अम्रता गौंड (11 वर्ष) पानी भरने के लिए कुएं पर गई थीं, जहां पैर फिसलने से तीनों बालिकाओं की डूबकर मौत हो गई. यह घटना क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट और नल-जल योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह समस्या केवल ग्राम सगौर तक सीमित नहीं है, बल्कि रायसेन जिले के अनेक दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर रूप धारण कर चुका है. करोड़ों रुपए खर्च कर संचालित की जा रही नल-जल योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है.

उन्होंने Chief Minister से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवारों को राज्य शासन की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता एवं अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि तीन मासूम बेटियों की असमय मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रदेशभर में नल-जल योजनाओं एवं पेयजल व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए.

डीकेपी/

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