सीपीआई ने तमिलनाडु के गवर्नर पर ‘समानांतर सरकार’ चलाने का लगाया आरोप, राष्ट्रपति से दखल देने की मांग की

चेन्नई, 5 जुलाई . कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने Sunday को तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर आरोप लगाया कि वे आम लोगों को अपनी शिकायतें लेकर राजभवन आने के लिए कहकर समानांतर Government की तरह काम करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी ने इस मामले में President द्रौपदी मुर्मु से दखल देने की मांग की है.

एक बयान में, सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि Saturday को राजभवन में एक किताब के विमोचन समारोह के दौरान गवर्नर की टिप्पणियां लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राज्य Government के अधिकार को खुली चुनौती देने जैसी थी.

सभा को संबोधित करते हुए गवर्नर ने कहा था कि समस्याओं का सामना कर रहे लोग मदद के लिए राजभवन आ सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक असमानताओं को खत्म करने के लिए काम करने वाले व्यक्ति और संगठन गवर्नर के कार्यालय से समर्थन मांग सकते हैं.

इस बयान पर वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि गवर्नर राजभवन को शिकायतों के समाधान के लिए एक वैकल्पिक मंच के रूप में पेश करके अपने कार्यालय की संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं. उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे बयानों से यह धारणा बनती है कि गवर्नर चुनी गई Government के लिए आरक्षित कार्यों को करने का इरादा रखते हैं, जिससे राज्य के प्रशासन में हस्तक्षेप होता है.

वीरपांडियन ने कहा, “गवर्नर की टिप्पणियां इस बात की घोषणा के समान हैं कि राजभवन एक समानांतर Government के रूप में काम करेगा.”

उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें संघीय ढांचे और केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक ढांचे को कमजोर करती हैं.

सीपीआई नेता ने तमिलनाडु Government और Chief Minister सी. जोसेफ विजय से आग्रह किया कि वे गवर्नर द्वारा संवैधानिक अधिकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी और Political दोनों तरह के कदम उठाएं.

वीरपांडियन ने तमिलनाडु Government और गवर्नर के बीच कानूनी विवाद में Supreme Court के पहले के फैसले का भी जिक्र किया और कहा कि शीर्ष अदालत ने गवर्नर की संवैधानिक शक्तियों और सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है. उन्होंने तर्क दिया कि गवर्नर की हालिया टिप्पणियां उन न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं और चुनी गई Government के कामकाज में हस्तक्षेप के समान थीं.

उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप की मांग करते हुए वीर पांडियन ने President मुर्मू से गवर्नर के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की अपील की. ​​उन्होंने आरोप लगाया कि गवर्नर ने संविधान द्वारा कार्यालय को दिए गए अधिकार से परे काम किया है और Supreme Court द्वारा निर्धारित संवैधानिक सीमाओं की अनदेखी की है. यह ताजा आलोचना गवर्नर की भूमिका और संवैधानिक जिम्मेदारियों को लेकर राजभवन और तमिलनाडु की पार्टियों के बीच चल रहे Political तनाव को और बढ़ाती है.

डीकेएम/पीएम

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