
Mumbai , 12 जून . Mumbai के किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन एमएआरडी (Maharashtra एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स) ने एक एमबीबीएस स्टूडेंट से जुड़े हालिया विवाद पर आधिकारिक बयान जारी किया है. संगठन ने स्पष्ट किया कि विवाद में शामिल छात्र केईएम एमएआरडी का सदस्य नहीं है, क्योंकि यह संगठन केवल रेजिडेंट डॉक्टरों और स्नातकोत्तर (पोस्टग्रेजुएट) प्रशिक्षुओं का प्रतिनिधित्व करता है.
जारी प्रेस विज्ञप्ति में केईएम एमएआरडी ने कहा कि मेडिकल समुदाय के सदस्य होने के नाते इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त करना जरूरी है. संगठन ने कहा कि वह पेशेवर आचरण, नैतिक मूल्यों और शरीरदान करने वाले लोगों के प्रति सम्मान के उच्चतम मानकों का पालन करता है. बयान में कहा गया कि छात्र द्वारा की गई टिप्पणियां अनुचित थीं, मेडिकल पेशेवरों से अपेक्षित मूल्यों के अनुरूप नहीं थीं और स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत करने वाली थीं.
हालांकि, संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित छात्र ने सार्वजनिक रूप से अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांग ली है. केईएम एमएआरडी ने स्पष्ट किया कि वह छात्र की टिप्पणियों का समर्थन नहीं करता, लेकिन उसके खिलाफ चल रहे व्यक्तिगत हमलों, ऑनलाइन गाली-गलौज और लक्षित उत्पीड़न को भी उचित नहीं मानता.
संगठन ने कहा कि सार्वजनिक चर्चा निष्पक्ष, जिम्मेदार और केवल घटना तक सीमित रहनी चाहिए. बयान में विशेष रूप से कहा गया कि इस विवाद को छात्र के आरक्षण कोटे के माध्यम से हुए प्रवेश जैसे असंबंधित मुद्दों से जोड़ना गलत है. केईएम एमएआरडी ने कहा कि मेडिकल समुदाय जवाबदेही, आत्मचिंतन और सीखने की प्रक्रिया का समर्थन करता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि चर्चा सम्मानजनक, संतुलित और मानवीय बनी रहे.
एक कॉमेडी शो के दौरान एमबीबीएस स्टूडेंट द्वारा की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है. social media पर छात्र की ट्रोलिंग की जा रही है और उस पर एक्शन लेने की मांग की जा रही है. लोगों का कहना है कि डॉक्टर या मेडिकल स्टूडेंट्स की बातचीत उचित नहीं थी. यह संवेदनहीनता थी.
शो के दौरान मानव शवों और शरीर दान करने वालों के बारे में कही गई थीं. वीडियो social media पर वायरल होने के बाद कई डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और आम लोगों ने इन टिप्पणियों को असंवेदनशील और शरीर दान करने वालों का अपमान बताया था.
–
एएमटी/वीसी