मराठा आरक्षण को लेकर विवाद तेज, ओबीसी संगठनों ने आंदोलन और महाराष्ट्र बंद करने की चेतावनी दी

Mumbai , 3 जून . Maharashtra में मराठा आरक्षण को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है. ओबीसी संगठनों और नेताओं ने Government को चेतावनी दी है कि अगर मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया या ‘सगे-सोयरे’ अध्यादेश को लागू किया गया तो राज्यभर में बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा. नेताओं ने साफ कहा कि इस फैसले का सीधा असर ओबीसी समुदाय के अधिकारों पर पड़ेगा और इसके लिए Government पूरी तरह जिम्मेदार होगी.

ओबीसी महासंघ से जुड़े नेता Tuesday को Mumbai में एकत्र हुए, जहां उन्होंने Government के सामने अपना विरोध दर्ज कराया और इसे वापस लेने की मांग की. उनका कहना है कि अगर मराठा समुदाय को ओबीसी में शामिल किया जाता है तो यह मौजूदा आरक्षण ढांचे को प्रभावित करेगा.

नेताओं ने Supreme Court के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है. उनका कहना है कि Maharashtra में पहले से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 22 प्रतिशत और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, ऐसे में किसी भी नए वर्ग को जोड़ने से संतुलन बिगड़ जाएगा.

नेताओं ने यह भी दावा किया कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत है, इसलिए उसे ओबीसी वर्ग में शामिल करना उचित नहीं होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि कुणबी और मराठा अलग-अलग जातियां हैं, लेकिन ‘सगे-सोयरे’ जैसे प्रावधानों के जरिए पुराने रिकॉर्ड खंगालकर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की संभावना है, जिससे ओबीसी समुदाय के युवाओं की नौकरी और शिक्षा के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.

ओबीसी नेताओं ने Government को 12 जून तक का समय दिया और कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यभर में बड़े आंदोलन शुरू किए जाएंगे. इसमें Mumbai में मोर्चा निकालने और जरूरत पड़ने पर Maharashtra बंद तक की चेतावनी शामिल है.

इस बीच ओबीसी नेता प्रकाश शेंडगे ने कहा कि ओबीसी समाज के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई विशेष समिति को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और इसके स्थान पर एक नई समिति का गठन किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समिति ओबीसी हितों को प्रभावी तरीके से नहीं देख रही है.

एसएचके/डीकेपी

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