बंगाल में मतुआ समुदाय की नागरिकता पर विवाद, 20 दिसंबर को पीएम मोदी शुरू करेंगे तृणमूल के खिलाफ भाजपा का अभियान

कोलकाता, 5 दिसंबर . Prime Minister Narendra Modi इस महीने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के रानाघाट में एक विशाल रैली के जरिए मतुआ समुदाय की नागरिकता से जुड़े विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के आरोपों का मुकाबला करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का बड़ा चुनावी अभियान शुरू करेंगे.

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कई मतुआ समुदाय के लोगों के मतदान अधिकार छिन सकते हैं, जिसका नतीजा उनकी नागरिकता खत्म होने के रूप में सामने आएगा. इसके विपरीत, भाजपा का दावा है कि तृणमूल जानबूझकर गलत प्रचार कर रही है और समुदाय को भ्रमित कर रही है.

भाजपा के पश्चिम बंगाल इकाई के एक पदाधिकारी के अनुसार, 20 दिसंबर को रानाघाट में रैली की तिथि तय की गई है. रानाघाट को राज्य के दो प्रमुख मतुआ गढ़ों में से एक माना जाता है. दूसरा प्रमुख क्षेत्र उत्तर 24 परगना जिले का बगनान है.

गौरतलब है कि रानाघाट Lok Sabha सीट वर्तमान में भाजपा के जगन्नाथ Government के पास है, जो 2019 और 2024 दोनों में लगातार इस सीट से निर्वाचित हुए हैं.

मतुआ समुदाय सामाजिक रूप से पिछड़े हिंदू प्रवासी हैं, जो समय के साथ धार्मिक शरणार्थी के रूप में बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आए. इनकी उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में भारी चुनावी ताकत है. 2019 Lok Sabha चुनाव के बाद से समुदाय के बड़े हिस्से ने हर चुनाव में भाजपा का समर्थन किया है.

Political विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में बंगाल की सत्ता पर कब्जा करने के लिए भाजपा को मतुआ-बहुल सीटों पर जीतना बेहद महत्वपूर्ण है. इसी वजह से पार्टी ने मतुआ-बहुल रानाघाट को Prime Minister की रैली के लिए चुना है, ताकि तृणमूल कांग्रेस के एसआईआर को लेकर फैलाए जा रहे “प्रचार” का जवाब दिया जा सके.

विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा चुनावों में अभी एक साल बाकी होते हुए भी चुनाव अभियान की शुरुआत Prime Minister से करवाना यह संकेत देता है कि भाजपा अपने नारे “2024 में Odisha, 2025 में बिहार और 2026 में पश्चिम बंगाल” को गंभीरता से जमीन पर उतारने में जुट चुकी है.

डीएससी

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