कांग्रेस सरकार मुंबई आतंकी हमले को ‘हिंदू आतंकवाद’ का रंग देना चाहती थी : सुधांशु त्रिवेदी

New Delhi, 13 जुलाई . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने Monday को वायनाड भूस्खलन के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस के साथ ही गांधी परिवार को घेरा. इसके साथ ही Mumbai के 11 जुलाई 2006 को सीरियल ट्रेन धमाके के 20 साल पूरे होने पर तत्कालीन कांग्रेस Government की खामियों को भी उजागर किया.
BJP MP ने कहा कि Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 2019 में अपनी पारंपरिक खानदानी सीट से ‘जमीन’ गंवाने के बाद वायनाड की ‘जमीन’ से Lok Sabha पहुंचे थे. बाद में उन्होंने यह सीट प्रियंका गांधी वाड्रा को देते हुए कहा था कि वायनाड को ‘दो-दो सांसद’ मिलेंगे. आज जब वायनाड भारी वर्षा और जमीन खिसकने जैसी दुखद त्रासदी से जूझ रहा है, तब गांधी परिवार के दोनों ही सांसद ‘जमीन’ पर दिखाई नहीं दे रहे हैं.
BJP MP ने कहा कि वायनाड और केरलम की जनता जानना चाहती है कि इस संकट की घड़ी में उनके सांसद कहां हैं. यह भी नहीं पता कि वे दुनिया के किस कोने में हैं. जिन्होंने वायनाड से Political आधार पाया, वही आज उसके सबसे कठिन समय में जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं. यह वायनाड और केरलम की जनता के साथ एक दुखद मजाक जैसा प्रतीत होता है, जिसके लिए गांधी परिवार को वायनाड और केरलम की जनता से माफी मांगनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि India की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक पुराना जख्म एक बार फिर से हरा हो गया. 2006 में Mumbai लोकल ट्रेन ब्लास्ट के 20 साल पूरे हो गए. हाल ही में एक एजेंसी को दिए इंटरव्यू में गृह मंत्रालय के तत्कालीन उपसचिव आरवीएस मणि ने कहा कि 26/11 हमले में अगर अजमल आमिर कसाब जीवित नहीं पकड़ा गया होता, तो हिंदू आतंकवाद की थ्योरी को चस्पा करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी. अभी तक कांग्रेस के बारे में यह धारणा बनी थी कि कांग्रेस माओवादी और मुस्लिमलीगी हो चुकी है, लेकिन अब पुराने तथ्य एक और गंभीर चीज की तरफ इशारे कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि 11 दिसंबर 2008 को तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद में कहा कि नेवी को कुछ संदिग्ध गतिविधियां मिली थीं, लेकिन उनको फॉलो न करने का निर्णय लिया गया. यह बहुत गंभीर बात है. मणि ने यह भी कहा कि 2006 और उसके बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तथाकथित हिंदू आतंकवाद के केसों की जानकारी ली. कांग्रेस को यह भी जवाब देना चाहिए है कि जो आदमी Government का हिस्सा नहीं है, वह Government की गंभीर गोपनीय गुप्तचर सूचनाओं की जानकारी कैसे ले रहा है. दिग्विजय सिंह ने यह भी बोला था कि शहीद हेमंत करकरे ने उन्हें कुछ जानकारी दी. गनीमत है कि वह आज जिंदा नहीं हैं, नहीं तो आज दिग्विजय सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती, क्योंकि एक राष्ट्रीय सुरक्षा की जांच के विषय को वह एक गैर-Governmentी व्यक्ति के साथ कैसे साझा कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि 26/11 के हमले में जब डेविड कोलमैन हेडली की इंटर लोकेशन की बात आई तो तत्कालीन Government ने उसको इंटर लोकेट क्यों नहीं किया. केवल अमेरिका में जाकर इंटरव्यू लेकर क्यों आ गए. उस समय तथाकथित हिंदू आतंकवाद के अनेक मामलों में जब Pakistan में बैठा आरिफ साफ-साफ कह रहा था कि उसने फंडिंग की है तो फिर क्यों सारे Pakistanी आरोपियों को बरी करके मामले को हिंदू आतंकवाद की तरफ मोड़ दिया गया.
भाजपा नेता ने कहा कि जितने भी 26/11 के आतंकवादी थे, वो सब फर्जी हिंदू आई कार्ड लिए थे. सबने अपने हाथों में कलावा बांधा हुआ था. यदि Maharashtra Police के अमर बलिदानी शहीद तुकाराम ओंबले ने अपने प्राण देकर कसाब को जिंदा न पकड़ा होता, तो उनकी फेक आईडी और हाथ में बंधे कलावा को आधार बनाकर तथाकथित हिंदू आतंकवाद की थ्योरी को चस्पा कर दिया गया होता.
उन्होंने कहा कि इशरत जहां का शपथपत्र बदला गया, ये जानकारी भी अधिकारियों ने ही दी थी. जब हमारी Government आई तो शपथपत्र बदलने की फाइल गायब थी. अमेरिका के पूर्व President बराक ओबामा ने अपनी किताब में 2010 की मनमोहन सिंह की बातचीत और 2010 की यात्रा के आधार पर लिखा है कि 26/11 हमले के बाद India की सेना Pakistan पर बड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार थी, लेकिन India Government ने ऐसा नहीं किया. आज कांग्रेस से हमारा यह सीधा सवाल है कि वाकई आईएसआई और आईएनसी में कोई मैच फिक्सिंग थी, जिसकी वजह से आप उन लोगों पर बड़ी कार्रवाई नहीं करना चाहते थे?
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एमएस/एबीएम


