भारतीय सेना की ताकत पर मुहर: चीन सीमा विवाद पर सामने आई वास्तविकता

New Delhi, 25 अप्रैल . भारत-चीन सीमा को लेकर लंबे समय से Political बहस चलती रही है. एक तरफ विपक्ष Government पर यह आरोप लगाता रहा है कि चीन ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की और सच्चाई को छिपाया गया, वहीं दूसरी ओर अब देश के पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के बयान ने इस पूरे मुद्दे पर एक स्पष्ट और मजबूत जवाब पेश किया है.

नरवणे ने के साथ इंटरव्यू के दौरान साफ शब्दों में कहा कि भारतीय सेना की सख्त और रणनीतिक कार्रवाई के कारण ही चीन की सेना (पीएलए) को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा. यह कोई सामान्य स्थिति नहीं थी, बल्कि यह India की सैन्य क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है. सीमा पर जो भी सैन्य कार्रवाई हुई, वह केवल सेना का काम नहीं था, बल्कि पूरे देश के सामूहिक प्रयास का परिणाम थी. Government, सेना और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल ने ही India को मजबूत स्थिति में खड़ा किया.

विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया और Government ने पारदर्शिता नहीं दिखाई. लेकिन पूर्व सेना प्रमुख का यह बयान इन आरोपों को सीधे तौर पर चुनौती देता है. नरवणे ने इस पर सवाल उठाने वालों को भी दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अगर दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर करना जीत नहीं है, तो फिर जीत की परिभाषा क्या होगी?

सेना के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से ये कहना कि India ने चीन को पीछे हटने पर मजबूर किया, यह साफ संकेत है कि जमीनी हालात विपक्ष के दावों से अलग हैं. यह बयान न केवल सेना की कार्रवाई को सही ठहराता है, बल्कि देश के सामने वास्तविक तस्वीर भी रखता है.

वहीं, नरवणे ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि अब India की रणनीति पहले से ज्यादा आक्रामक और निर्णायक हो गई है. पहले जहां सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाता था, वहीं इस ऑपरेशन में आतंक के नेतृत्व को भी सीधा निशाना बनाया गया. यह बदलाव इस बात का संकेत है कि India अब केवल जवाब नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन को उसके घर में घुसकर जवाब देने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है.

नरवणे के अनुसार, अगर कोई देश India के खिलाफ साजिश करेगा या सीमा पर तनाव बढ़ाएगा, तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा. इस बदली हुई रणनीति ने न केवल Pakistan को, बल्कि चीन को भी एक स्पष्ट संदेश दिया है कि India अपनी संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा.

सीमा पर चीन को पीछे हटने पर मजबूर करना और आतंक के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना इस ओर इशारा करते हैं कि India अब सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक और प्रभावी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है.

एएस/

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