
गुवाहाटी, 11 अगस्त . असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Tuesday को कहा कि राज्य Government बड़े कृषि आय करदाताओं पर कृषि आयकर फिर से लागू करेगी, जबकि छोटे किसानों और सालाना 10 लाख रुपए तक की आय वाले छोटे चाय उत्पादकों को इससे पूरी तरह छूट दी जाएगी.
गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरमा ने कहा कि राज्य Government ने पिछले छह वर्षों से लागू कृषि आयकर छूट को बड़े करदाताओं के लिए समाप्त करने का फैसला किया है. इस कर से प्राप्त राजस्व का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण और विकास के लिए किया जाएगा.
Chief Minister ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से छोटे चाय उत्पादकों और किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, “सालाना 10 लाख रुपए तक की कृषि आय वाले छोटे चाय उत्पादकों को कृषि आयकर नहीं देना होगा.”
उन्होंने बताया कि इस छूट से छोटे स्तर पर काम करने वाले चाय उत्पादकों को राहत मिलेगी.
असम बजट 2026-27 में छोटे चाय उत्पादकों के लिए कृषि आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए सालाना करने का प्रस्ताव रखा गया था. वहीं, बड़े करदाताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से कृषि आयकर फिर से लागू करने की घोषणा की गई थी.
सरमा ने कहा कि यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि कृषि आय उत्पादन, खेती के आकार, बाजार मूल्य और खर्चों के आधार पर काफी अलग-अलग हो सकती है.
Government की नीति के अनुसार, कर छूट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे चाय उत्पादक किसी भी तरह से प्रभावित न हों. वहीं बड़े कृषि और चाय उत्पादन से जुड़े कारोबारी राज्य के राजस्व में योगदान दें.
Chief Minister ने जोर देकर कहा कि Government का उद्देश्य आम किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है. उन्होंने कहा कि इस कर से मिलने वाली आय का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण, सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों पर किया जाएगा.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब असम Government चाय उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ चाय बागान श्रमिकों और उनसे जुड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार कर रही है.
राज्य बजट में ऑर्थोडॉक्स और विशेष किस्म की चाय पर उत्पादन सब्सिडी 10 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति किलोग्राम करने का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा माचा जैसी प्रीमियम चाय किस्मों को भी प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है.
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एएमटी/डीकेपी