
New Delhi, 7 अगस्त . केंद्र Government ने Friday को संसद में बताया कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) के जरिए फार्मास्युटिकल सेक्टर को मार्च 2026 तक 6,659 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है.
Lok Sabha में लिखित में एक प्रश्न का लिखित में उत्तर देते हुए रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना- पीएलआई वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई. इस योजना में कुल 15,000 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय में से, मार्च 2026 तक 6,659 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है.
Union Minister ने आगे कहा कि थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना के तहत , कुल 6,940 करोड़ रुपए के परिव्यय में से मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है.
थोक दवाओं संबंधी पीएलआई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण में लगने वाले समय, पर्यावरण मंजूरी, उच्च उपयोगिता लागत, फर्मन्टेशन यानी किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि आदि जैसी कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ा है.
रासायनिक संश्लेषण के विपरीत, किण्वन जीवित कोशिकाओं की जैविक गतिविधि पर निर्भर करता है, जिनकी वृद्धि की गति प्राकृतिक और धीमी होती है. इन सब कारणों से परियोजनाएं आरंभ होने में देरी हुई. इससे निधि वितरण भी प्रभावित हुआ क्योंकि प्रोत्साहन राशि इन परियोजनाओं में निर्मित उत्पादों की बिक्री के आधार पर जारी की जाती है.
Union Minister ने आगे कहा कि Government चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना भी चला रही है और इसमें मार्च 2026 तक 266.64 रुपए वितरित किए जा चुके हैं.
इसके अतिरिक्त, Government ने कहा कि Prime Minister भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के अंतर्गत पिछले दो वित्तीय वर्षों में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर कुल बिक्री 4274.66 करोड़ रुपए रही. इसमें से वित्त वर्ष 2024-25 में बिक्री 2022.47 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2025-26 में बिक्री 2252.19 करोड़ रुपए रही है.
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एबीएस