
धनबाद, 4 फरवरी . Chief Minister हेमंत सोरेन ने केंद्र की Government पर Jharkhand के साथ लगातार सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया है. झामुमो के 54वें स्थापना दिवस पर धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने Wednesday को कहा कि केंद्र ने लंबे समय से Jharkhand के हक का पैसा रोक रखा है.
उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह आंदोलन के जरिए अलग Jharkhand राज्य हासिल किया गया था, उसी तरह राज्य के लंबित बकाये को हासिल करने के लिए भी संघर्ष किया जाएगा. सोरेन ने दावा किया कि यदि Jharkhand को उसका वाजिब वित्तीय हिस्सा मिला होता, तो राज्य आज तेलंगाना, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ से कहीं आगे होता.
उन्होंने कहा कि Jharkhand ने देश को खनिज, श्रम और संसाधन दिए, लेकिन बदले में यहां के लोगों को गरीबी, अशिक्षा और शोषण मिला. सोरेन ने देशभर की चाय बागानों में कार्यरत आदिवासी श्रमिकों के शोषण का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि देश का चाय उद्योग आदिवासी श्रमिकों के खून-पसीने से खड़ा हुआ है, लेकिन आज भी वही समुदाय सबसे ज्यादा शोषण और उपेक्षा का शिकार है.
सोरेन ने कहा कि करीब 150 साल पहले Jharkhand के आदिवासियों को सिलिगुड़ी, अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना और अन्य राज्यों के चाय बागानों में जबरन, कई बार बंदूक की नोक पर, मजदूरी के लिए ले जाया गया था. वो आदिवासी आज भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी तकलीफों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
सोरेन ने इसे गंभीर और शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि वह जल्द ही Prime Minister मोदी से मुलाकात कर चाय बागानों में काम कर रहे आदिवासी श्रमिकों के लिए सम्मानजनक जीवन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग रखेंगे.
Chief Minister ने कहा कि आदिवासी समाज ने न केवल चाय उद्योग, बल्कि Gujarat सहित देश के कई राज्यों के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई है, इसके बावजूद उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार नहीं मिल पाए हैं. राज्य में हो रहे नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए सोरेन ने आदिवासी समाज से एकजुट होकर Political ताकत दिखाने की अपील की.
झामुमो अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की स्थापना 4 फरवरी 1973 की मध्यरात्रि में धनबाद में हुई थी, और यही कारण है कि धनबाद का गोल्फ ग्राउंड झामुमो के इतिहास में प्रतीकात्मक महत्व रखता है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में अलग तिथियों पर स्थापना दिवस मनाया जाता है, लेकिन धनबाद का आयोजन पार्टी की जड़ों की याद दिलाता है.
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एसएनसी/एएसएच