यादों में रेणु : ‘मैला आंचल’ के ‘गुलफाम’, समाज, साहित्य और सादगी को साधने वाले शब्दशिल्पी

New Delhi, 10 अप्रैल . हर साल की 11 अप्रैल कैलेंडर पर दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है. यह तारीख उस आवाज की खामोशी का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुख को शब्दों में ऐसा ढाला कि वे हमेशा के लिए जीवंत हो गए. साल 1977 में 11 अप्रैल … Read more

द ग्रेट एस्केप: सुरंग, साहस और सजा! द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फरारी की कहानी

New Delhi, 23 मार्च . नाजी जर्मनी के कड़े सुरक्षा वाले युद्धबंदी शिविर स्टालाग लुफ्ट तृतीय से 70 से अधिक मित्र राष्ट्रों के सैनिकों का सुरंग बनाकर भाग निकलना इतिहास में ‘द ग्रेट एस्केप’ के नाम से दर्ज है. 24 मार्च 1944 की रात हुई ये साधारण फरारी नहीं थी, बल्कि महीनों की गुप्त योजना, … Read more

एडगर एलन पो: आधुनिक रहस्य और हॉरर साहित्य के जनक, जिन्होंने डर को शब्दों में ढाला

New Delhi, 18 जनवरी . एडगर एलन पो अमेरिकी साहित्य के उन विरले लेखकों में हैं जिन्होंने लेखन की दिशा ही बदल दी. उन्हें आधुनिक रहस्य, जासूसी और हॉरर साहित्य का जनक माना जाता है. उनके साहित्य ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में लेखकों और पाठकों की सोच को प्रभावित किया. भय, अवचेतन … Read more

‘चार्ल्स डिकेन्स’ की एक किताब जिसने क्रिसमस को इंसानियत का त्योहार बना डाला

New Delhi, 18 दिसंबर . शांति, प्यार और खुशियों का त्योहार क्रिसमस करीब है. ईसा मसीह को समर्पित इस दिन पर विशेष इंतजाम किए जाते हैं. वर्षों पहले इसमें खुशियों को एड करने की एक कोशिश चार्ल्स डिकेन्स ने की. एक ऐसी कहानी रची जिसने लोगों की सोच बदली और उस सोच ने इस पर्व … Read more

जेन ऑस्टिन: रोमांस की रानी, जिनकी 19वीं सदी में लिखी कहानियां आज भी दिल को छू जाती हैं

New Delhi, 15 दिसंबर . ‘हर्टफोर्डशायर की उस नृत्य सभा में, जब मिस्टर डार्सी अपने संकोची और अभिमानी स्वभाव के साथ प्रवेश करते हैं और एलिजाबेथ बेनेट उन्हें पहली नजर में नापसंद कर लेती हैं…’ वहीं से प्राइड एंड प्रेजुडिस की कहानी आगे बढ़ती है. यह सिर्फ प्रेम कथा की शुरुआत नहीं होती, बल्कि समाज, … Read more

मशीनों से खेलता एक जादूगर: नाम रूब गोल्डबर्ग, बच्चे से बड़ों तक सबके लिए क्यों है इतने खास

New Delhi, 7 दिसंबर . हम लोगों में से अधिकांश ने ऐसे मजेदार वीडियो जरूर देखें होंगे जिसमें छोटा सा काम करने के लिए बेवजह की जटिल मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे एक गेंद लुढ़कती है, फिर डोमिनोज गिरते हैं, फिर कोई लीवर घूमता है और अंत में एक साधारण-सा बल्ब जल उठता … Read more

डेविड स्जेले को मिला बुकर प्राइज, क्यों जूरी ने माना ‘फ्लेश’ है ‘सिंगुलर अचीवमेंट’

New Delhi, 11 नवंबर . लंदन में आयोजित बुकर प्राइज 2025 समारोह में डेविड शजाले की नई उपन्यास फ्लेश को वह सम्मान मिला जिसकी अवहेलना करना मुश्किल था. जूरी ने इसे “सिंगुलर अचीवमेंट” (विलक्षण उपलब्धि) कहा—एक ऐसा उपन्यास जिसे, उनके शब्दों में, उन्होंने “पहले कभी नहीं पढ़ा.” फ्लेश को यह विशिष्ट स्थान सिर्फ उसके विषयों … Read more